aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
| Author: | Rabisankar Bal |
| Language: | Hindi |
| Publisher: | Rekhta Publications |
| Year: | 2025 (1st Edition) |
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रबिशंकर बल का उपन्यास “रूमी – एक आईना-सी ज़िंदगी” जलालुद्दीन बल्ख़ी से मौलाना रूमी बनने के रूहानी इन्क़िलाब को बयान करता है। मसनवी और रूमी की शायरी के सदियों पर फैलते असर को यह तसनीफ़ एक नई ताबीर देती है। रूमी की ज़िंदगी में इश्क़, फ़िराक़ और तख़्लीक़ी जुनून के जो मोड़ आए, यह किताब उनकी गहराई में उतरती है।
इब्न–ए–बतूता की निगाह से लिखा गया यह बयान रूह की “घर-वापसी” की तड़प का इल्म देती है। यह किताब अपने अंदर उस दर्द और तलाश को सँजोती है जो इंसान को उसके अस्ल वतन की तरफ़ पुकारती है।
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इस उपन्यास का बंगाली से हिंदी में अनुवाद प्रसिद्ध अनुवादक अमृता बेड़ा ने किया है।