aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
| Author: | Khaleel-Ur-Rehman Azmi |
| Language: | Hindi |
| Publisher: | Rekhta Publications |
| Binding: | Paperback (164 pg) |
| Year: | 2018 (1st Edition) |
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उस वक्त जब शायरी महबूब के आरिज़ ओ लब ,बुलबल ओ चमन, हुस्न ओ इश्क की जंजीरों में जकड़ी हुई थी खलिल साहब ने अपने समकालीनों के साथ उसे जदीदियत की ओर मोड़ा. उसे प्रगतिशील बनाया और उसमें वो लफ़्ज इस्तेमाल किए जो अमूमन शायरी की ज़बान से दूर रखे जाते हैं. तेरी सदा का इंतजार खलील-उर-रहमान आज़मी की चुनिंदा उर्दू शाइरी का संग्रह है। यह पुस्तक "रेखता नुमाइंदा कलाम" श्रृंखला के तहत रेखता फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित की गई है। इस श्रृंखला के साथ, रेख़्ता फ़ाउंडेशन का उद्देश्य वर्तमान युग के प्रतिष्ठित अभी तक कम जानने वाले उर्दू कवियों की सर्वश्रेष्ठ उर्दू शाइरी को सामने लाना है।