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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

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Ziaul Mustafa Turk's Photo'

ज़ियाउल मुस्तफ़ा तुर्क

1976 | मुल्तान, पाकिस्तान

ज़ियाउल मुस्तफ़ा तुर्क

ग़ज़ल 15

अशआर 17

थोड़ी सी बारिश होती है

कितनी जल्दी भर जाता हूँ

जब बच्चों को देखता हूँ तो सोचता हूँ

मालिक इन फूलों की उम्र दराज़ करे

आवाज़ों में बहते बहते

ख़ामोशी से मर जाता हूँ

क़तरा क़तरा छत से ही रिसने लगी

धूप का रस्ता था दीवार में

तू किसी सुब्ह सी आँगन में उतर आती है

मैं किसी धूप सा दालान में जाता हूँ

 

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