aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "sindh"
'फ़ैज़' औज-ए-ख़याल से हम नेआसमाँ सिंध की ज़मीं की है
हर मौज-ए-आब-ए-सिंध हुई वक़्फ़-ए-पेच-ओ-ताब'महरूम' जब वतन में हमारी ख़बर गई
के-पी-के अफ़्ग़ानिस्तान है और बलोचिस्तान ईरानसिंध है चीन में और प्यारा पंजाब अरब का हिस्सा है
मैं हर दरगाह पे जाऊँगीहो सिंध हो या लाहौर सजन
फ़त्ह-बाग़ी ने नसर-पूरी हैं बल्किसिंध में भी हैदराबादी हैं हम
हज़ाराँ शुक्र मुल्क-ए-सिंध में भीमिरा मस्कन है शहर-ए-हैदराबाद
जब हिन्दी सिंधी पंजाबी इस्लाम में आ कर एक हुएऐ फ़िरक़ा-परस्तो बाज़ आओ फिर फ़िरक़ा-परस्ती ला'नत है
रावी की शाम सिंध की निखरी हुई सहरकाम आ सके तो उन को मिरी ज़िंदगी लगे
किनार-ए-सिंध गुज़री है मिरी इक उम्र ऐ शबनमसलीक़ा मुझ को दरिया ने सिखाया अश्क-बारी का
पहचान मुझे भी कि ज़मीं शक्ल है मेरीमैं सिंध का चेहरा हूँ न पंजाब की सूरत
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