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शेर
शिकस्त ओ फ़त्ह मियाँ इत्तिफ़ाक़ है लेकिन
मुक़ाबला तो दिल-ए-ना-तवाँ ने ख़ूब किया
नवाब मोहम्मद यार ख़ाँ अमीर
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ग़ज़ल
वो अदा-ए-दिलबरी हो कि नवा-ए-आशिक़ाना
जो दिलों को फ़त्ह कर ले वही फ़ातेह-ए-ज़माना
जिगर मुरादाबादी
नज़्म
जुगनू
वो मेरी माँ मैं कभी जिस की पीठ पर न चढ़ा
वो मेरी माँ कभी कुछ जिस के कान में न रखा
फ़िराक़ गोरखपुरी
नज़्म
बरसात की बहारें
फुँसी किसी के तन में सर पर किसी के फोड़े
छाती ये गर्मी दाने और पीठ में दरोड़े

