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नज़्म
क्लर्क का नग़्मा-ए-मोहब्बत
यूँ कहता है वूँ कहता है लेकिन बेकार ही रहता है
मैं उस की ऐसी बातों से थक जाता हूँ थक जाता हूँ
मीराजी
नज़्म
गुरु-नानक
हर आन दिलों विच याँ अपने जो ध्यान गुरु का धरते हैं
और सेवक हो कर उन के ही हर सूरत बीच कहाते हैं
नज़ीर अकबराबादी
लेख
अब्दुल माजिद दरियाबादी
ग़ज़ल
न दाइम ग़म है ने इशरत कभी यूँ है कभी वूँ है
तबद्दुल याँ है हर साअ'त कभी यूँ है कभी वूँ है
बहादुर शाह ज़फ़र
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रेख़्ता शब्दकोश
aur
और اَور
एक आदेश में दो व्यक्तियों (इत्यादि) को सम्मिलित करने के उद्देश्य से प्रयुक्त, पर्यायवाची:-ओ-, नीज़, भी, इत्यादि
'aur
'और عَور
कानापन, एक आँख का होना।
aur kaa
और का اَور کا
belonging to another
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ग़ज़ल
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
जश्न-ए-आज़ादी
माँग है स्टेरीओ की और वी-सी-आर की
ख़ैर हो अब आडियो वीडियो के कारोबार की
सरफ़राज़ शाहिद
ग़ज़ल
कन-अँखियों की निगह गुपती इशारत क़हर चितवन के
जो वूँ देखा तो बर्छी है जो यूँ देखा तो भाला है
नज़ीर अकबराबादी
शेर
कल 'नज़ीर' उस ने जो पूछा ब-ज़बान-ए-पंजाब
नेह विच मेंडी ए की हाल-ए-तुसादा वे मियाँ
नज़ीर अकबराबादी
ग़ज़ल
कहते हो वूँ से हो के इधर आओ वूँ चलें
क्या ख़ूब क्यूँ न दौड़ पड़ूँ ऐसे दम के साथ
इंशा अल्लाह ख़ान इंशा
ग़ज़ल
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
नज़्म
क़ौमी तराना
'इक़बाल' और 'टैगोर' से शाइ'र पी-सी-रे से फ़ाज़िल
वी-सी-रामन शाह सुलैमाँ जे-सी-बोस से कामिल
मोहम्मद शफ़ीउद्दीन नय्यर
ग़ज़ल
लेक उठ कर जब वो जाता है तो बे-ताबी से मैं
वूँ ही कहता हूँ ''तिरे क़ुर्बान जाऊँ आ, न जा''


