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नज़्म
जवाब-ए-शिकवा
अदल है फ़ातिर-ए-हस्ती का अज़ल से दस्तूर
मुस्लिम आईं हुआ काफ़िर तो मिले हूर ओ क़ुसूर
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
सच जहाँ पा-बस्ता मुल्ज़िम के कटहरे में मिले
उस अदालत में सुनेगा अद्ल की तफ़्सीर कौन
परवीन शाकिर
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नज़्म
तीन आवाज़ें
वो ये कहते हैं हर इक ज़ुल्म तिरे हुक्म से है
गर ये सच है तो तिरे अद्ल से इंकार करूँ?
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
तंज़-ओ-मज़ाह
मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी
नज़्म
मुझे जाना है इक दिन
अभी तहज़ीब-ए-अदल-ओ-हक़ की कश्ती खे नहीं सकती
अभी ये ज़िंदगी दाद-ए-सदाक़त दे नहीं सकती
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
दार-उल-मकाफ़ात
कुछ देर नहीं अंधेर नहीं इंसाफ़ और अदल-परस्ती है
इस हाथ करो उस हाथ मिले याँ सौदा दस्त-ब-दस्ती है
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
इंक़लाब
शमीम-ए-अदल से महकें ये कूचा ओ बाज़ार
गुज़र भी जा कि तिरा इंतिज़ार कब से है
मख़दूम मुहिउद्दीन
नज़्म
शाएर लोग
दुख-भरी ख़ल्क़ का दुख-भरा दिल हैं हम
तब्अ-ए-शाएर है जंगाह-ए-अद्ल-ओ-सितम
