aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम ",fGwI"
फ़हमी बदायूनी
1952 - 2024
शायर
शौकत फ़हमी
born.1965
फ़ैसल फ़हमी
फ़िदवी लाहौरी
1729 - 1780
जमाल अब्बास फ़हमी
born.1962
अय्यूब फ़हमी
born.1923
मिर्ज़ा मोहम्मद अली फ़िदवी
died.1790
फ़रीदा आलम फ़हमी
शौकत अली फ़हमी
1901 - 1993
लेखक
फ़िदा-उल-मुस्तफ़ा फिदवी
born.1952
ग़ुलाम क़ुद्दूस फ़हमी
सय्यद महमूद अाज़म फ़हमी
फ़िदवी दकनी
निशात फ़हमी
born.1929
तस्ख़ीर फ़हमी
संपादक
पूछ लेते वो बस मिज़ाज मिराकितना आसान था इलाज मिरा
चाँद की पिघली हुई चाँदी मेंआओ कुछ रंग-ए-सुख़न घोलेंगे
चल साथ कि हसरत दिल-ए-मरहूम से निकलेआशिक़ का जनाज़ा है ज़रा धूम से निकले
तेरे जैसा कोई मिला ही नहींकैसे मिलता कहीं पे था ही नहीं
Hindustan Par Mughliya Hukoomat
भारत का इतिहास
Hind Aur Pakistan Ke Auliya
जीवनी
Akhlaqi Kahaniyan
कहानी
Abdur Razzaque Malih Abadi Aur Urdu Sahafat
मोहम्मद साजिद ज़की फ़हमी
पत्रकारिता
फ़ैज़ फ़हमी
तक़ी आबिदी
Ehtisham husain
Angrez Ka Sharmanak Daur-e-Hukumat
Aulaad Ki Tarbiyat
शिक्षाप्रद
Aaina-e-Iqbaliyat
कैटलॉग / सूची
Mukammal Tareekh-e-Islam
Quran Fahmi
हसनुद्दीन अहमद
इस्लामियात
Allama Shibli Nomani Ki Quran Fahmi
मोहम्मद सऊद आलम क़ासमी
Inqalab Ki Khooni Tareekh
Mukammal Tareekh-e-Hind
Amjad Fahmi
ज़रा मोहतात होना चाहिए थाबग़ैर अश्कों के रोना चाहिए था
और आदमी पे तेग़ को मारे है आदमीपगड़ी भी आदमी की उतारे है आदमी
सारी दुनिया को है ग़लत-फ़हमीमुझ पे तो मेहरबान है प्यारे
काश वो रास्ते में मिल जाएमुझ को मुँह फेर कर गुज़रना है
जब कहीं ज़ौक़-ए-सुख़न-फ़हमी नहीं'कैफ़' साहब की ग़ज़ल हम गाएँ क्या
ख़ुश-फ़हमी अभी तक थी यही कार-ए-जुनूँ मेंजो मैं नहीं कर पाया किसी से नहीं होगा
मैं ने उस की तरफ़ से ख़त लिक्खाऔर अपने पते पे भेज दिया
परेशाँ है वो झूटा इश्क़ कर केवफ़ा करने की नौबत आ गई है
ख़ुशी से काँप रही थीं ये उँगलियाँ इतनीडिलीट हो गया इक शख़्स सेव करने में
तुम्हें बस ये बताना चाहता हूँमैं तुम से क्या छुपाना चाहता हूँ
तेग़ की हिन्दी अगर तलवार हैफ़ारसी पगड़ी की भी दस्तार है
इक उम्र तक मैं उस की ज़रूरत बना रहाफिर यूँ हुआ कि उस की ज़रूरत बदल गई
ख़ूँ पिला कर जो शेर पाला थाउस ने सर्कस में नौकरी कर ली
नमक की रोज़ मालिश कर रहे हैंहमारे ज़ख़्म वर्ज़िश कर रहे हैं
डाली है इस ख़ुश-फ़हमी ने 'आदत मुझ को सोने कीनिकलेगा जब सूरज तो ख़ुद मुझ को आन जगाएगा
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books