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ग़ज़ल
संसार से भागे फिरते हो भगवान को तुम क्या पाओगे
इस लोक को भी अपना न सके उस लोक में भी पछताओगे
साहिर लुधियानवी
नज़्म
जुगनू
हिमाक़तों का मिरी फ़ल्सफ़ा समझ न सकी
वो माँ कभी जिसे चौंकाने को मैं लुक न सका
फ़िराक़ गोरखपुरी
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ई-पुस्तक
लोक-गीत
लोक-गीत
समस्त
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नज़्म
परछाइयाँ
ये धज न दे जो अजंता की सनअतों को पनाह
ये सीना पड़ ही गई देव लोक की भी निगाह
फ़िराक़ गोरखपुरी
ग़ज़ल
इश्क़ तो मुश्किल है ऐ दिल कौन कहता सहल है
लेक नादानी से अपनी तू ने समझा सहल है



