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नज़्म
जवाब-ए-शिकवा
वज़्अ में तुम हो नसारा तो तमद्दुन में हुनूद
ये मुसलमाँ हैं जिन्हें देख के शरमाएँ यहूद
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
औरत
उठ मिरी जान मिरे साथ ही चलना है तुझे
तेरे क़दमों में है फ़िरदौस-ए-तमद्दुन की बहार
कैफ़ी आज़मी
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नज़्म
हमारे उस्ताद
सब को तहज़ीब-ओ-तमद्दुन का सबक़ देते हैं
हम को इंसान बनाते हैं हमारे उस्ताद
कैफ़ अहमद सिद्दीकी
नज़्म
ख़िताब ब-जवानान-ए-इस्लाम
تمدن آفريں خلاق آئين جہاں داري
وہ صحرائے عرب يعني شتربانوں کا گہوارا
अल्लामा इक़बाल
तंज़-ओ-मज़ाह
कन्हैया लाल कपूर
नज़्म
नौ-जवान से
गिरा दे क़स्र-ए-तमद्दुन कि इक फ़रेब है ये
उठा दे रस्म-ए-मोहब्बत अज़ाब पैदा कर
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
किसान
जिस की मेहनत से फबकता है तन-आसानी का बाग़
जिस की ज़ुल्मत की हथेली पर तमद्दुन का चराग़
जोश मलीहाबादी
नज़्म
मादाम
नूर-ए-सरमाया से है रू-ए-तमद्दुन की जिला
हम जहाँ हैं वहाँ तहज़ीब नहीं पल सकती
साहिर लुधियानवी
नज़्म
यकसूई
मैं समझता हूँ तक़द्दुस को तमद्दुन का फ़रेब
तुम रसूमात को ईमान बनाती क्यूँ हो