aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "کینوس"
कैनवस कम्युनिकेशंस, कराची
पर्काशक
जे. एम. केंस
लेखक
तस्वीर जब नई है नया कैनवस भी हैफिर तश्तरी में रंग पुराने न घोलिए
मैं रंगों में हूँ कभी बरश मेंकभी कैनवस पे सजी हूँ मैं
पिछले साल, एक रोज़ शाम के वक़्त दरवाज़े की घंटी बजी। मैं बाहर गयी। एक लंबा तड़ंगा यूरोपीयन लड़का कैनवस का थैला कंधे पर उठाये सामने खड़ा था। दूसरा बंडल उसने हाथ में सँभाल रखा था और पैरों में ख़ाकआलूद पेशावरी चप्पल थे। मुझे देखकर उसने अपनी दोनों एड़ियाँ ज़रा...
रात कल गहरी नींद में थी जबएक ताज़ा सफ़ेद कैनवस पर
जीत कर आते हैं जब मैच गली के लड़केजूते पहने हुए कैनवस के उछलते हुए गेंदों की तरह
हम हुस्न को देख सकते हैं, महसूस कर सकते हैं इस से लुत्फ़ उठा सकते हैं लेकिन इस का बयान आसान नहीं। हमारा ये शेरी इन्तिख़ाब हुस्न देख कर पैदा होने वाले आपके एहसासात की तस्वीर गिरी है। आप देखेंगे कि शाइरों ने कितने अछूते और नए नए ढंग से हसन और इस की मुख़्तलिफ़ सूरतों को बयान किया। हमारा ये इन्तिख़ाब आपको हुस्न को एक बड़े और कुशादा कैनवस पर देखने का अहल भी बनाएगा। आप उसे पढ़िए और हुस्न-परस्तों में आम कीजिए।
Yadon Ki Duniya
यूसुफ़ हुसैन ख़ाँ
भारत का इतिहास
कागज़ और कैनवस
अमृता प्रीतम
संकलन
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Aug 1976कैनवास
लहू का रंग फैला है हमारे कैनवस परतेरी तस्वीर अब जा कर मुकम्मल हो रही है
तो फिर ये ज़िंदगी का कैनवस रंगों से भर जातामयस्सर है मुझे भी
मसऊद ने मायूस हो कर ख़ास्सादान उठा लिया और चुप चाप दरवाज़े से बाहर निकल गया... दफ़्तर पहुंच कर उसने ख़ास्सादान कुर्सी के पास रख दिया और ख़िलाफ़ मामूल वहां खड़ा हो गया। उसके चचा ने फाईल में काग़ज़ पिरोते हुए ऐनक के ऊपर से देखा और तुर्श रु हो...
वो रात आफ़ताब राय ने शदीद बेचैनी से काटी। हालात बद से बदतर होते जा रहे थे। मुसलमान तालिब-इ'ल्मों को अच्छे नंबर न मिलते। हिंदुओं को यूँही पास कर दिया जाता। हॉस्टलों में हिंदू मुसलमान इकट्ठे रहते थे। लेकिन जिस होस्टल में मुसलमानों की अक्सरीयत थी। उस पर सब्ज़ पर्चम...
ناول نگاری کافی دنوں تک اعتبار فن سے محروم رہی لیکن بورژوا نظام کے عروج نے اس کے آرٹ کی حصار بندی کی۔ ناول اور حقیقت نگاری کے ضمن میں لکھتے ہوئے رالف فاکس نے اس طرف بھی خاصی توجہ دی ہے۔ فن ناول نگاری کو موجودہ صورت و سیرت...
کشور ناہید کی شاعری میں خصوصاً نثری نظموں میں نسائی شعور اور تلخ حقائق ابھر کر سامنے آتے ہیں جن سے اس عہد کی خواتین دو چار ہیں۔ نثری نظم کی شاعرات میں نسرین انجم بھٹی۔ عذرا عباس، سیما خان اور کزئی، شائستہ حبیب، سارا شگفتہ، تنویر انجم نے نسائی...
मुहतरम बहन, तस्लीमात। मैंने पिछले दिनों आपको बांद्रा के मेले पर चंद सहेलियों के साथ देखा था। आपने पीले रंग की जॉर्जट की साड़ी पहन रखी थी, बॉर्डर के बग़ैर। ब्लाउज़ काली साटन का था। खुले गले का, आस्तीनों के बग़ैर। गले पर ज़र्द रंग की साटन का पाइपिंग था...
पहला मसला रिहायश का था। उसका इंतिख़ाब-ओ-इंतिज़ाम प्रोफ़ेसर की नाक़िस राय पर छोड़ दिया गया मगर उनकी नज़र में कोई होटल नहीं जचता था। एक 'अल्ट्रा माडर्न’ होटल को इसलिए नापसंद किया कि उसके ग़ुस्ल-ख़ाने बड़े कुशादा थे मगर कमरे मूज़ी की गौर की तरह तंग। दूसरे होटल को इसलिए...
میں نے بال نہ کٹوائے۔ رات کو میں نے اپنے کینوس شو پر پالش کر دیا تھا۔ ڈبل ریٹ پر دھلوائی ہوئی سفید پتلون پہن کر میں اتوار کی صبح کو ’ماہم‘ میں ’’ایننک لیٹومینشنز‘‘ کے پاس فٹ پاتھ پر کھڑا تھا۔ والدہ تیسری منزل کے فلیٹ کی بالکنی پر...
इस ने ज़बान-ए-'मीर' को हिन्दी का रस दियाउर्दू ग़ज़ल को इस ने नया कैनवस दिया
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