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शेर
कुछ तुम्हें तर्स-ए-ख़ुदा भी है ख़ुदा की वास्ते
ले चलो मुझ को मुसलमानो उसी काफ़िर के पास
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
नज़्म
काएँ काएँ कव्वा टें टें मिठ्ठू
कव्वा रो रो के जब आह भरने लगा
उस पे मिठ्ठू ने ये तर्स खा कर कहा
अहमद हातिब सिद्दीक़ी
ग़ज़ल
तुझे कुछ भी ख़ुदा का तर्स है ऐ संग-दिल तरसा
हमारा दिल बहुत तरसा अरे तरसा न अब तरसा
नज़ीर अकबराबादी
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रेख़्ता शब्दकोश
taaraa
तारा تارا
आकाश में चमकनेवाला नक्षत्र। सितारा। मुहा०-तारा टूटना तारे का आकाश से अपनी कक्षा से निकलकर पथ्वी पर या आकाश में किसी ओर गिरना। तारा डबना = (क) किसी तारे या नक्षत्र का अस्त होना। (ख) शक्र का अस्त होना। (शुक्रास्तं में हिंदुओं के यहाँ मंगल कार्य नहीं किये जाते) तारा सी आँखें हो जाना-इतनी ऊँचाई या दूरी पर पहुँच जाना कि तारे की तरह बहुत छोटा जान पड़ने लगे। तारे खिलना या छिटकना = आकाश में तारों का चमकते हुए दिखाई देना। तारे गिनना चिंता, विकलता आदि से नींद न आने के कारण कष्टपूर्वक जागकर रात बिताना। (आकाश के) तारे तोड़ लाना कठिन से कठिन अथवा प्रायः असंभव से काम कर दिखाना। तारे दिखाई देना-दुर्बलता, रोग आदि के कारण आँखों के सामने रह-रहकर प्रकाश के छोटे-छोटे कण दिखाई देना। तारे दिखाना = प्रसूता स्त्री को छठी के दिन बाहर लाकर आकाश की ओर इसलिए तकाना कि भूत-प्रेत आदि की बाधा दूर हो जाय। (मुसल०) पद-तारों की छाँह-इतने तड़के या सबेरे कि तारों का धुंधला प्रकाश दिखाई दे।
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ग़ज़ल
तर्स-ए-उक़बा है तो मय-ख़ाना में रह ऐ ज़ाहिद
तब बचो वाँ जो बजा कान में क़ुलक़ुल पहुँचे
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी
ग़ज़ल
बुत-ए-संग-दिल ख़ुदा का तुझे तर्स हो जो कुछ भी
तू शिकस्ता दिल को मत कर कि ये शीशा है न संदाँ
इंशा अल्लाह ख़ान इंशा
नज़्म
वतन के वास्ते
तर्स आता है तुम्हारे हाल पर ऐ हिंदियों
ग़ैर के मुहताज हो अपने कफ़न के वास्ते
कुंवर प्रताप चंद्र आज़ाद
ग़ज़ल
डरे क्यूँ मेरा क़ातिल क्या रहेगा उस की गर्दन पर
वो ख़ूँ जो चश्म-ए-तर से उम्र भर यूँ दम-ब-दम निकले






