aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम ".erfk"
तअशशुक़ लखनवी
1824 - 1892
शायर
शाद आरफ़ी
1900 - 1964
इकराम आरफ़ी
उर्फ़ी आफ़ाक़ी
born.1936
मुहिब आरफ़ी
born.1919
अब्दुल हई आरफ़ी
हस्सान आरफ़ी
born.1985
राशिद आरफ़ी
born.1943
उर्फ़ी शीराज़ी
1555 - 1590
लेखक
उर्फ़ी शीराज़ी
मौलाना जमालउद्दीन उर्फ़ी
फ़ख़रुद्दीन आरिफ़ी
तस्लीम अहमद आरफ़ी
born.1998
सईद आरफी
संपादक
सय्यद आरिफ़ अली गीलानी
वो सिब्तैन-ए-मोहम्मद, जिन को जाने क्यूँ बहुत अरफ़ातुम उन की दूर की निस्बत से भी यकसर मुकर जाना
'शाद' ग़ैर-मुमकिन है शिकवा-ए-बुताँ मुझ सेमैं ने जिस से उल्फ़त की उस को बा-वफ़ा पाया
कटती है आरज़ू के सहारे पे ज़िंदगीकैसे कहूँ किसी की तमन्ना न चाहिए
तुम सलामत रहो क़यामत तकऔर क़यामत कभी न आए 'शाद'
ये लोग जिन्हें उर्फ़-ए-आम में लीडर कहा जाता है, सियासत और मज़हब को लंगड़ा, लूला और ज़ख़्मी आदमी तसव्वुर करते हैं।...
Jadeed Practice of Medicine
हरबंस लाल
औषधि
Mir Taqi Mir Aur Aaj Ka Zauq-e-Sheri
तुलनात्मक अध्ययन
Chhalni Ki Piyas
Ullu Tantra Urf Khazana-e-Tilismat
बंसी लाल चड्ढा
अन्य
काव्य संग्रह
Merchant Of Venice Urf Dilfarosh
विलियम शेक्सपियर
नाटक / ड्रामा
Urfi Shirazi
वलीवुल हक़
शायरी तन्क़ीद
Taryaq-e-Akbar
Sayyad Ali Urf Ramazan Ali Lucknwi
तिब्ब-ए-यूनानी
haalat-e-qutub deccan hazrat syed hasan urf barhana shah saahab
मोहम्मद अली खाँ
शरह-ए-मुतरजिम क़साइद-ए-उर्फ़ी
अनुवाद
Deewan-e-Aam Urf Karhve Badam
मुंशी मुनक़्क़ा
दीवान
Khooni Kanpur Urf Bahadur Aurat
मोहम्मद इब्राहीम अबरार देहलवी
स्वतंत्रता आंदोलन
Deewan-e-Aam
Haqeeqat-us-Surat
शैख़ अहमद उर्फ़ बख़्शू मियाँ
Aurat
अरफ़ा सैय्यदा ज़हरा
चला था मैं तो समुंदर की तिश्नगी ले करमिला ये कैसा सराबों का सिलसिला मुझ को
जज़्बा-ए-मोहब्बत को तीर-ए-बे-ख़ता पायामैं ने जब उसे देखा देखता हुआ पाया
देख कर शाइ'र ने उस को नुक्ता-ए-हिकमत कहाऔर बे-सोचे ज़माने ने उसे ''औरत'' कहा
रंग लाएगी हमारी तंग-दस्ती एक दिनमिस्ल-ए-ग़ालिब 'शाद' गर सब कुछ उधार आता गया
जब चली अपनों की गर्दन पर चलीचूम लूँ मुँह आप की तलवार का
मेरी अल्लाह से बस इतनी दुआ है 'राशिद'मैं जो उर्दू में वसीयत लिखूँ बेटा पढ़ ले
नहीं है इंसानियत के बारे में आज भी ज़ेहन साफ़ जिन कावो कह रहे हैं कि जिस से नेकी करोगे उस से बदी मिलेगी
अपने जी में जो ठान लेंगे आपया हमारा बयान लेंगे आप
वो आए जाता है कब से पर आ नहीं जातावही सदा-ए-क़दम का है सिलसिला कि जो था
कहीं फ़ितरत बदल सकती है नामों के बदलने सेजनाब-ए-शैख़ को मैं बरहमन कह दूँ तो क्या होगा
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