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नज़्म
नया शिवाला
शक्ति भी शांति भी भगतों के गीत में है
धरती के बासीयों की मुक्ती प्रीत में है
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
रूप को धोका समझो नज़र का या फिर माया-जाल कहो
प्रीत को दिल का रोग समझ लो या जी का जंजाल कहो
सय्यद शकील दस्नवी
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नज़्म
हिण्डोला
फ़सानों से मिरे दिल ने घुलावटें पाईं
यही नहीं कि मशाहीर ही के अफ़्साने
फ़िराक़ गोरखपुरी
नज़्म
ईद
रुख़ों पे फूल खिलाएँ कि जश्न का दिन है
दिलों में प्रीत जगाएँ कि जश्न का दिन है
शिफ़ा कजगावन्वी
ग़ज़ल
रुत बीत चुकी है बरखा की और प्रीत के मारे रहते हैं
रोते हैं रोने वालों की आँखों में सावन रहता है
क़य्यूम नज़र
ग़ज़ल
हम आवारा गाँव गाँव बस्ती बस्ती फिरने वाले
हम से प्रीत बढ़ा कर कोई मुफ़्त में क्यूँ ग़म को अपना ले
हबीब जालिब
ग़ज़ल
भूले से जाने-अनजाने वार न करना तुम उन पर
जिन जिन के कंधों पर है ये प्रीत की डोली बाबू-जी
कुंवर बेचैन
ग़ज़ल
जिस बादल ने सुख बरसाया जिस की छाँव में प्रीत मिली
आँखें खोल के देखा तो वो सब मौसम लम्हाती थे
फ़रहत ज़ाहिद
नज़्म
सिरी कृष्ण
फ़ज़ा-ए-दहर में गाता फिरा वो प्रीत के गीत
नशात-ख़ेज़-ओ-सुकूँ-रेज़ बाँसुरी ले कर


