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peT
पेट پیٹ
उक्त अंग के भीतरी भाग की वह थैली जिसमें पहुँचकर खाया हुआ भोजन पचता है, आमाशय, ओझर, पचौनी, विशेष-पेट में होनेवाले विकारों तथा उसकी आवश्यकताओं से संबंधित पद और मुहावरे इसी अर्थ के अंतर्गत आये हैं, पद-पेट का कुता जो केवल भोजन के लालच से सब कुछ करता या कर सकता हो, केवल पेट के लिए सब कुछ करनेवाला, पेट का धंधा , रसोई बनाने का काम या व्यवस्था, जैसे-स्त्रियाँ सबेरे उठते ही पेट के धंधे में लग जाती हैं, जीविका-निर्वाह के लिए किया जानेवाला उद्योग, काम-धंधा, पेट को आग भख, क्षुधा, पेट के लिए इस उद्देश्य से कि पेट भरने का साधन बना रहे, उदर पूर्ति या जीविका-निर्वाह के लिए, मुहा०-पेट अफरना पेट में ऐसा विकार होना कि वह वायु से भर और फूल जाय, पेट आना-पतले दस्त आना, (वव०) पेट और पीठ एक हो जाना या पेट पीठ से लग जाना बहुत भूख लगना, बहुत अधिक दुबला हो जाना, (अपना) पेट काटना पैसे बचाने के लिए कम खाना, इसलिए कम खाना कि पैसों की कुछ बचत हो, (किसी का) पेट काटना ऐसा काम करना जिससे किसी को खाने के लिए आवश्यक या उचित से कम अन्न या धन मिले, जैसे- गरीब का पेट नहीं काटना चाहिए, पेट का पानी तक न हिलना कुछ भी कष्ट या परिश्रम न पड़ना, जरा भी तकलीफ या मेहनत न होना, पेट का पानी न पचना किसी काम या बात के लिए इतनी उत्सुकता और विकलता होना कि उसके बिना रहा न जा सके, पेट को आग बुझाना पेट में भोजन पहुँचाना, खाकर भूख मिटाना, (किसी को) पेट को मार देना (या मारना), भूखा रखना, भोजन न देना
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नज़्म
सुना है
सुना है जंगलों का भी कोई दस्तूर होता है
सुना है शेर का जब पेट भर जाए तो वो हमला नहीं करता
ज़ेहरा निगाह
नज़्म
बंजारा-नामा
ये खेप जो तू ने लादी है सब हिस्सों में बट जावेगी
धी पूत जँवाई बेटा क्या बंजारन पास न आवेगी
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
नया शिवाला
हर सुब्ह उठ के गाएँ मंतर वो मीठे मीठे
सारे पुजारियों को मय पीत की पिला दें
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
एक पहाड़ और गिलहरी
तिरी बिसात है क्या मेरी शान के आगे
ज़मीं है पस्त मिरी आन-बान के आगे
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
चलते हो तो चमन को चलिए कहते हैं कि बहाराँ है
पात हरे हैं फूल खिले हैं कम-कम बाद-ओ-बाराँ है
मीर तक़ी मीर
ग़ज़ल
कहें हैं सब्र किस को आह नंग ओ नाम है क्या शय
ग़रज़ रो पीट कर उन सब को हम यक बार बैठे हैं

