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ग़ज़ल
ख़द-ओ-ख़ाल ख़ूबी-आगीं लब-ए-लाल पाँ से रंगीं
नज़र आफ़त-ए-दिल-ओ-दीं मिज़ा सद-मुज़र्रत-अफ़ज़ा
नज़ीर अकबराबादी
ग़ज़ल
दिल-ओ-दीं खो के कोई यास की दुनिया न बने
न बने बुत ये ख़ुदा भी हों तो बंदा न बने
अब्दुल करीम शाइक़
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aafat-e-dil-e-'aashiqaa.n
आफ़त-ए-दिल-ए-'आशिक़ाँ آفَتِ دِلِ عاشِقاں
प्रेमियों का दुर्भाग्य
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ग़ज़ल
ऐ दिल-ए-ज़ार लिखो जानिब-ए-जानाँ काग़ज़
हाल का लिखते हैं फ़ुक़रा सू-ए-सुल्ताँ काग़ज़
मातम फ़ज़ल मोहम्मद
ग़ज़ल
जान-ओ-ईमाँ दीन-ओ-दिल जो था बिसात अपना दिया
और क्या चाहे है तू मुझ से जो अब आज़ुर्दा है
मीर मोहम्मदी बेदार
शेर
यार पर इल्ज़ाम कैसा ऐ दिल-ए-ख़ाना-ख़राब
जो किया तुझ से तिरी क़िस्मत ने उस ने क्या किया
लाला माधव राम जौहर
नज़्म
ऐ दिल-ए-अफ़सुर्दा
ऐ दिल-ए-अफ़सुर्दा ऐ कम-बख़्त ऐ हसरत-नसीब
ऐ फ़रेब-ए-हुस्न के पामाल ऐ फुर्क़त-नसीब
सय्यद आबिद अली आबिद
शेर
ये गुस्ताख़ी ये छेड़ अच्छी नहीं है ऐ दिल-ए-नादाँ
अभी फिर रूठ जाएँगे अभी तो मन के बैठे हैं
दाग़ देहलवी
ग़ज़ल
असर-ए-आह-ए-दिल-ए-ज़ार की अफ़्वाहें हैं
या'नी मुझ पर करम यार की अफ़्वाहें हैं


