आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "apnaate"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "apnaate"
शेर
तुम को बेगाने भी अपनाते हैं मैं जानता हूँ
मेरे अपने भी पराए हैं तुम्हें क्या मालूम
सैफ़ुद्दीन सैफ़
ग़ज़ल
तुम को बेगाने भी अपनाते हैं मैं जानता हूँ
मेरे अपने भी पराए हैं तुम्हें क्या मालूम
सैफ़ुद्दीन सैफ़
ग़ज़ल
सय्यदा फ़रहत
पृष्ठ के संबंधित परिणाम "apnaate"
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम "apnaate"
नज़्म
डॉज-महल
क़ैस ओ लैला भी तो करते थे मोहब्बत लेकिन
इश्क़-बाज़ी के लिए दश्त को अपनाते थे
सरफ़राज़ शाहिद
ग़ज़ल
सुबह होती है तो जैसे इक हक़ीक़त जान कर
गुम-शुदा ख़्वाबों की ताबीरों को अपनाते हैं हम
मीर नक़ी अली ख़ान साक़िब
नज़्म
अपने दिल की शहज़ादी
तेरी तो दौलत के बाइ'स बेगाने तुझे अपनाते हैं
और मेरी ग़ुर्बत के बाइ'स अपने भी मुझे ठुकराते हैं
सलाम संदेलवी
ग़ज़ल
हम कि हर निस्बत-ए-मौहूम को अपनाते रहे
इक शिकस्ता से तअ'ल्लुक़ को भी कितना समझे
अकबर हैदरी कश्मीरी
ग़ज़ल
फूलों की ख़्वाहिश में अक्सर काँटों को अपनाते हैं
आदत से मजबूर हैं अपना दामन ख़ुद उलझाते हैं
बलराज कुमार
ग़ज़ल
करते हैं जिस पे ता'न कोई जुर्म तो नहीं
शौक़-ए-फ़ुज़ूल ओ उल्फ़त-ए-नाकाम ही तो है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
ए'तिराफ़
जन्नत-ए-शौक़ थी बेगाना-ए-आफ़ात-ए-सुमूम
दर्द जब दर्द न हो काविश-ए-दरमाँ मालूम






