aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "aura.ng"
औरंग ज़ेब
शायर
ज़ोहेब फ़ारूक़ी अफ़रंग
born.1993
अनन्त फ़ानी
born.1989
उमंग बाली
औरंगज़ेब अाज़मी
लेखक
मकतबा-ए-औरंग, लखनऊ
पर्काशक
औरंग पब्लिकेशन, पटना
मोहम्मद यगाना अरानी
इस्लामिक रिपब्लिक, ईरान
सरदार अयाग़
मकतबा-ए-अरज़ंग, पेशावर
मरकज़ तहक़ीक़ात फ़ार्सी ईरान-ओ-पाकिस्तान, इस्लामाबाद
मरकज़ तहक़ीक़ात फ़ार्सी ईरान-ओ-पाकिस्तान
हज़रत आहंग
आंग सान सू की
इक खेल है औरंग-ए-सुलैमाँ मिरे नज़दीकइक बात है एजाज़-ए-मसीहा मिरे आगे
इश्क़ से मैं डर चुका था डर चुका तो तुम मिलेदिल तो कब का मर चुका था मर चुका तो तुम मिले
ये बातों ही बातों में बातें बदलनाकोई तुम से सीखे ये आँखें बदलना
اے شہنشاہ آسماں اورنگاے جہاں دار آفتاب آثار
एक मुख़्तार हो, औरंग-ए-जहाँबानी काइक मुरक़्क़ा हो ग़म-ओ-रंज-ओ-परेशानी का
सौ मशहूर दीवान कुल्लियात का चयन .
नए साल की आमद को लोग एक जश्न के तौर पर मनाते हैं। ये एक साल को अलविदा कह कर दूसरे साल को इस्तिक़बाल करने का मौक़ा होता है। ये ज़िंदगी के गुज़रने और फ़ना की तरफ़ बढ़ने के एहसास को भूल कर एक लमहाती सरशारी में महवे हो जाता है। नए साल की आमद से वाबस्ता और भी कई फ़िक्री और जज़्बाती रवय्ये हैं, हमारा ये इंतिख़ाब इन सब पर मुश्तमिल है।
किसी भी विद्यार्थी के जीवन में शिक्षक का एक महत्वपूर्ण योगदान होता है. जहां माता-पिता बच्चों की शारीरिक नशो नुमा में हिस्सा लेते हैं वहीं शिक्षक बौद्धिक विकास में. आज का दिन शिक्षकों के इन्हीं योगदानों के लिए ख़िराज-ए-तहसीन पेश करने का है. इस शिक्षक दिवस पर हमने आपके लिए कुछ अच्छे शेरों का एक चयन किया है. इन्हें पढ़ीए और अपने शिक्षकों के साथ साझा कीजीए.
औरंग اَورَن٘گ
तख़्त, राज सिंहासन
नैरंग نَیرَنگ
अद्भुत या विलक्षण चीज या बात
तरंग تَرَنگ
किसी चीज़ या बात का ऐसा सामंजस्यपूर्ण उतार-चढ़ाव जो लहरों के समान जान पड़े
सुरंग سُرَنگ
ज़र-ए-ज़मीन नाली जिस में दुश्मन की फ़ौज को उड़ाने के लिए बारूद भर दिया जाता है
Ahd-e-Abbasi Mein Tarjuma Nigaari
2019
Ahval-e-Maqbara Rabia Durrani-o-Khandan-e-Aurang Zaib
आग़ा मिर्ज़ा बेग
2008इतिहास
Aurang Suleman
आफ़ाक़ सिद्दीक़ी
1985जीवनी
Tibb-e-Aurang Shahi
Darwesh Mohammad Hakeem Aimanabadi
पाण्डुलिपि
Aurang-e-Fikr
अलीम सबा नवेदी
2023शाइरी
Masnawi Haft-e-Aurang
नूरुद्दीन अहमद
1951शाइरी
औरंग
इक़बाल ख़ुसरो क़ादरी
2006
Maghribi Adab Ki Tahreeken
2024
Haft Aurang
इक़बाल हुसैन अंसारी
1938
Ahang Aur Arooz
कमाल अहमद सिद्दीक़ी
2008भाषा एवं साहित्य
अरूज़ आहंग और बयान
शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी
1977छंदशास्र
Adabiyat-e-Jadeed Iran
मंज़र इमाम
1996भाषा एवं साहित्य
Irani Koka Shastra
अज़मत अली हसरत लखनवी
काम शास्त्र
Irani Inqilaab Imam Khumaini Aur Sheeyat
मोहम्मद मंज़ूर नोमानी
1984इतिहास
Tareekh-e-Iran
मिर्ज़ा मक़बूल बेग बदख़्शानी
1967इतिहास
इश्क़ क्या है बेबसी है बेबसी की बात करये भी कोई ज़िंदगी है ज़िंदगी की बात कर
आइना है ख़याल की हैरतउस पे तेरे जमाल की हैरत
ये भी ए'जाज़ कहीं बाद-ए-मुख़ालिफ़ का न होदिल उड़ा जाता है औरंग-ए-सुलैमाँ की तरह
आम रस्ते से हट के आया हूँसारी दुनिया से कट के आया हूँ
आ कर उरूज कैसे गिरा है ज़वाल परहैरान हो रहा हूँ सितारों की चाल पर
मैं ने वो नज़्म लिखी है कि ख़ुदा जानता हैउस का हर लफ़्ज़ ख़ुदाई का पता जानता है
हर तरफ़ सतवत-ए-अर्ज़ंग दिखाई देगीरंग बरसेंगे ज़मीं दंग दिखाई देगी
कौन अथा में उतरे मेरी किस पे खुले हंगाम मिराअश्क से कैसे भाँप सकोगे ख़ून में है कोहराम मिरा
फ़ुंदुक-ए-दस्त-ए-सनम से नादिमगुल-ए-औरंग रहा करता है
निहत्ते आदमी पे बढ़ के ख़ंजर तान लेती हैमोहब्बत में न पड़ जाना मोहब्बत जान लेती है
उड़ रहा है 'ज़ेब' की तहरीर के आहंग मेंये परिंदा हज़रत-ए-इक़बाल का शाहीन है
आइने से गुज़रने वाला थाअक्स-ए-हस्ती बिखरने वाला था
1میں زینت اورنگ سلیمان سخن ہوں
नहीं ये जीत नहीं है तू इस को मात समझकि तेरे साथ यहाँ हो गया है हाथ समझ
लर्ज़िश भी है सतह-ए-फ़लक पर गर्दिश करते सितारों कीवक़्त का इक ठहराव भी है इस औरंग-ख़याली में
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