आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "aura.ng-e-sulaimaa.n"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "aura.ng-e-sulaimaa.n"
ग़ज़ल
वो परी मेरे जनाज़े को जो कांधा देगी
तख़्ता ताबूत का औरंग-ए-सुलैमाँ होगा
अब्दुल मजीद ख़्वाजा शैदा
अन्य परिणाम "aura.ng-e-sulaimaa.n"
ग़ज़ल
बे-ताज हूँ बे-तख़्त हूँ बे-मुल्क-ओ-हुकूमत
हाँ नाम का लेकिन मैं 'सुलैमान' रहा हूँ
सुलैमान अरीब हैदराबादी
ग़ज़ल
फ़त्ह दीजो तू उसे या शह-ए-मर्दां कि तिरा
मुल्क-गीरी को जो है अब ये 'सुलैमाँ' निकला
नवाब सुलेमान शिकोह
ग़ज़ल
बोरिया तख़्त-ए-सुलैमाँ से कहीं बेहतर है
हम ग़रीबों को नहीं ताज-ओ-नगीं का लालच
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
नज़्म
क़िला-ए-अकबराबाद
औरंग-ए-सियह-रंग जो क़ाएम है लब-ए-बाम
बोसा जिसे देता था हर इक ज़ुब्दा-ए-उज़्ज़ाम
इस्माइल मेरठी
ग़ज़ल
होते हैं जज़्ब-ए-इश्क़ से परियों के जमघटे
इक मुल्क मिस्ल-ए-मुल्क-ए-सुलैमाँ ख़रिदिए
आग़ा हज्जू शरफ़
शेर
पाया-ए-तख़्त-ए-सुलैमाँ का है शाएर 'मुसहफ़ी'
है उसी के ख़ातिम-ए-दस्त-ए-सुलैमाँ हाथ में