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नज़्म
इंक़िलाब
बे-कसों की सर्द-नफ़्सी मिट गई
उन को बख़्शा तू ने सोज़-ए-आफ़्ताब
अब्दुल मन्नान बेदिल अज़ीमाबादी
नज़्म
रामायण का एक सीन
कहते थे लोग देख के माँ बाप का मलाल
इन बे-कसों की जान का बचना है अब मुहाल
चकबस्त बृज नारायण
नज़्म
ख़ाक-ए-हिंद
बुलबुल को गुल मुबारक गुल को चमन मुबारक
हम बे-कसों को अपना प्यारा वतन मुबारक
चकबस्त बृज नारायण
नज़्म
दुआ
बे-कसों बे-सहारों को सब्र-ओ-क़नाअत की तल्क़ीन करते रहें
गर यही ज़िंदगी है तो मेरे ख़ुदा
आरिफ़ अख़्तर नक़वी
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रेख़्ता शब्दकोश
kaano.n ke patte
कानों के पत्ते کانوں کے پَتّے
ایک قسم کا زیور جو عورتیں کان میں پہنتی ہیں ؎
haath kaano.n pe rakhnaa
हाथ कानों पे रखना ہاتھ کانوں پَہ رَکھنا
۴۔ पनाह माँगना, तौबा करना
kaano.n pe haath rakhnaa
कानों पे हाथ रखना کانوں پَہ ہاتھ رَکْھنا
۱. रख : कानों पर हाथ धरना
kaano.n ke parde phaTnaa
कानों के पर्दे फट्ना کانوں کے پَرْدے پَھٹْنا
रुक : कानों के पर्दे उड़ जाना
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ग़ज़ल
'असद' ऐ बे-तहम्मुल अरबदा बे-जा है नासेह से
कि आख़िर बे-कसों का ज़ोर चलता है गरेबाँ पर
मिर्ज़ा ग़ालिब
नज़्म
मिरे गीत
ग़रीबों मुफ़लिसों को बे-कसों को बे-सहारों को
सिसकती नाज़नीनों को तड़पते नौ-जवानों को
साहिर लुधियानवी
नज़्म
बद-तमीज़
मैं ने देखा अभी
क़ीमती जैकेटों और कोटों में मलफ़ूफ़ कुछ बे-कसों को ठिठुरते हुए
हमीदा शाहीन
ग़ज़ल
ज़ि-बस-कि करते रहे बे-कसों पे तुम बेदाद
सदा गली में तुम्हारी दोहाइयाँ ही रहीं
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
मनक़बत
दुनिया में और कौन है अपना ब-जुज़ 'अली
हम बे-कसों को है तो सहारा 'अली का है
पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर गीलानी
ग़ज़ल
मेरी दौलत देख कर क्यूँ तुम ने ठंडी साँस ली
बे-कसों पर रस्म-ए-आईन-ए-सितमगारी नहीं
मुंशी नौबत राय नज़र लखनवी
नज़्म
शाइ'र
उस के नाज़ुक क़ल्ब में मिलता है मज़लूमों का दर्द
बे-कसों का है वो हामी बे-ज़बानों की ज़बाँ