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ग़ज़ल
हमेशा जिस से पहुँचता रहे था दिल को अलम
हज़ार शुक्र कि वो दर्द-ए-बे-दवा न रहा
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
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रेख़्ता शब्दकोश
dekh jagat me.n au dasaa mat Dar aur mat ro, binaa hukm bhagvaan ke baal na baa.nkaa ho
देख जगत में औ दसा मत डर और मत रो, बिना हुक्म भगवान के बाल न बाँका हो دیکھ جَگَت میں او دسا مَت ڈَر اور مَت رو، بِنا حُکم بَھگوان کے بال نَہ بانکا ہو
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कुल्लियात
क्या मैं ही जाँ-ब-लब हूँ बीमारी-ए-दिली से
मारा हुआ है 'आलम इस दर्द-ए-बे-दवा का
मीर तक़ी मीर
नज़्म
मिरे दर्द को जो ज़बाँ मिले
मिरा दर्द नग़मा-ए-बे-सदा
मिरी ज़ात ज़र्रा-ए-बे-निशाँ
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़ज़ल
मस्त-ए-शराब-ए-इश्क़ वो बे-ख़ुद है जिस को हश्र
ऐ 'दर्द' चाहे लाए ब-ख़ुद पर न ला सके
ख़्वाजा मीर दर्द
ग़ज़ल
जो ख़ुद से हो बे-परवा और इश्क़ से बेगाना
ऐ 'दर्द' वो क्या समझे अफ़्साना मोहब्बत का

