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उद्धरण
हिन्दुस्तान को उन लीडरों से बचाओ जो मुल्क की फ़िज़ा बिगाड़ रहे हैं और अवाम को गुमराह कर रहे हैं।...
सआदत हसन मंटो
ग़ज़ल
नवेद-ए-जाँ-फ़िज़ा है क्या ख़बर क़ातिल के आने की
बताओ तो सही तुम 'दाग़' ऐसे शादमाँ क्यूँ हो
दाग़ देहलवी
अप्रचलित ग़ज़लें
क्यों न फ़िरदौस में दोज़ख़ को मिला लें यारब
सैर के वास्ते थोड़ी सी फ़ज़ा और सही
मिर्ज़ा ग़ालिब
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विषय
फ़ज़ा
फ़ज़ा शायरी
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नज़्म
बुझी हुई जवानियाँ
न सरख़ुशी न आक़िली न आशिक़ी न बंदगी
न नग़्मा-ए-तरब-फ़िज़ा न ग़म-तराज़-ए-ज़िंदगी
क़ैसर अमरावतवी
ग़ज़ल
उस की सुब्हें दिल-कुशा हैं उस की शामें जाँ-फ़िज़ा
खो गया जो शख़्स लुत्फ़-ए-नाला-ए-शब-गीर में
क़ासिम जलाल
ग़ज़ल
उम्मीद-ए-शौक़ हो या वादा-ए-राहत-ٖफ़िज़ा कोई
मरीज़-ए-इश्क़ को अच्छा नहीं करती दवा कोई
ऋषि पटियालवी
ग़ज़ल
ज़िक्र वा'दे का ज़बाँ पर जो 'फ़ज़ा' की आया
बात इतनी सी थी लेकिन वो बुरा मान गया
हैदर हुसैन फ़िज़ा लखनवी
ग़ज़ल
नसीम आई बहार आई पयाम-ए-जाँ-फ़िज़ा लाई
'ख़याली' ज़िंदगी अब ज़िंदगी मा'लूम होती है
मोहम्मद नईमुल्लाह ख़्याली
ग़ज़ल
सरापा सोज़ लेकिन जाँ-फ़िज़ा मा'लूम होती है
सदा-ए-साज़-ए-दिल हक़ की सदा मा'लूम होती है
राज़ चाँदपुरी
नज़्म
क़र्या-ए-वीराँ
उस के लिए माहौल-ओ-फ़िज़ा के सारे बंधन टूट चुके
माज़ी-ओ-हाल भी छूट चुके







