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फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी

1923 - 2009 | मऊनाथ भंजन, भारत

शायरी में एक आज़ाद सृजनात्मक अभिव्यक्ति के लिए प्रसिद्ध

शायरी में एक आज़ाद सृजनात्मक अभिव्यक्ति के लिए प्रसिद्ध

ग़ज़ल 37

शेर 29

उस की क़ुर्बत का नशा क्या चीज़ है

हाथ फिर जलते तवे पर रख दिया

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आँखों के ख़्वाब दिल की जवानी भी ले गया

वो अपने साथ मेरी कहानी भी ले गया

मुझे तराश के रख लो कि आने वाला वक़्त

ख़ज़फ़ दिखा के गुहर की मिसाल पूछेगा

किस तरह उम्र को जाते देखूँ

वक़्त को आँखों से ओझल कर दे

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जला है शहर तो क्या कुछ कुछ तो है महफ़ूज़

कहीं ग़ुबार कहीं रौशनी सलामत है

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पुस्तकें 9

Dareecha-e-Seem-e-Saman

 

1989

कुल्लियात-ए-फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी

खण्ड-001

2011

पस-ए-दीवार-ए-हर्फ़

 

1991

Sabza-e-Mani-e-Begana

 

1994

Safina-e-Zar-e-Gul

 

1973

सर-ए-शाख़-तूबा

 

1990

Sar-e-Shakh-e-Tooba

 

1990

Shola-e-Neem Roz

 

1978

Shola-e-Neem Soz

 

1978

 

ऑडियो 10

आँखों के ख़्वाब दिल की जवानी भी ले गया

आह को बाद-ए-सबा दर्द को ख़ुशबू लिखना

जबीं पे गर्द है चेहरा ख़राश में डूबा

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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