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ग़ज़ल
कब आप का दर जल्वा-गह-ए-आम नहीं है
कब शाम-ओ-सहर दौर में वाँ जाम नहीं है
तहनियतुन्निसा बेगम तहनियत
ग़ज़ल
तूर के लुत्फ़-ए-ख़ुसूसी की क़सम पहले भी
मेरे दिल पर असर-ए-जल्वा-गह-ए-आम न था
अली मंज़ूर हैदराबादी
नज़्म
कहाँ है आ जा
रौनक़-ए-बज़्म है ओ जाम कहाँ है आ जा
ज़ीनत-ए-जल्वा-गह-ए-आम कहाँ है आ जा
शकील बदायूनी
ग़ज़ल
मैं चुप रहूँ तो गोया रंज-ओ-ग़म-ए-निहाँ हूँ
बोलूँ तो सर से पा तक हसरत की दास्ताँ हूँ
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
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ग़ज़ल
कब ख़ुदा जाने वो ख़ल्वत से बरामद होंगे
महफ़िल-ए-नाज़ अभी जल्वा-गह-ए-आम नहीं
नवाब सय्यद हकीम अहमद नक़्बी बदायूनी
ग़ज़ल
देखा गया न मुझ से मआनी का क़त्ल-ए-आम
चुप-चाप मैं ही लफ़्ज़ों के लश्कर से कट गया

