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नज़्म
शिकवा
आतिश-अंदोज़ किया इश्क़ का हासिल तू ने
फूँक दी गर्मी-ए-रुख़्सार से महफ़िल तू ने
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
काश अब बुर्क़ा मुँह से उठा दे वर्ना फिर क्या हासिल है
आँख मुँदे पर उन ने गो दीदार को अपने आम किया
मीर तक़ी मीर
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ग़ज़ल
जौन एलिया
फ़िल्मी गीत
दो-जहाँ की आज ख़ुशियाँ हो गईं हासिल मुझे
आप की नज़रों ने समझा प्यार के क़ाबिल मुझे
राजा मेहदी अली ख़ाँ
नज़्म
इस बस्ती के इक कूचे में
इस इश्क़ पे हम भी हँसते थे बे-हासिल सा बे-हासिल था
इक ज़ोर बिफरते सागर में ना कश्ती थी ना साहिल था
इब्न-ए-इंशा
ग़ज़ल
बज़्म-ए-अहबाब में हासिल न हुआ चैन मुझे
मुतमइन दिल है बहुत, जब से अलग बैठा हूँ
पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर गीलानी
नज़्म
फ़रार
मेरी उम्मीदों का हासिल मिरी काविश का सिला
एक बे-नाम अज़िय्यत के सिवा कुछ भी नहीं
साहिर लुधियानवी
नज़्म
एक नौ-जवान के नाम
इमारत किया शिकवा-ए-ख़ुसरवी भी हो तो क्या हासिल
न ज़ोर-ए-हैदरी तुझ में न इस्तिग़ना-ए-सलमानी








