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नज़्म
सुब्ह-ए-आज़ादी (अगस्त-47)
कहीं तो जा के रुकेगा सफ़ीना-ए-ग़म दिल
जवाँ लहू की पुर-असरार शाह-राहों से
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
मिरे हमदम मिरे दोस्त!
तिरी आँखों की उदासी तेरे सीने की जलन
मेरी दिल-जूई मिरे प्यार से मिट जाएगी
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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रेख़्ता शब्दकोश
jalan
जलन جَلَن
जलने की अवस्था, क्रिया या भाव, शरीर के किसी अंग के जलने पर उसमें होने वाली कष्टकारक चुनचुनाहट या पीड़ा, मानसिक वेदना या ताप, ईर्ष्या, डाह, कीना।, दुश्मनी, गु़स्सा
jalaa
जला جَلا
तर्क-ए-वतन, वतन छोड़ना
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ग़ज़ल
पूछा कि दोज़ख़ की जलन बोले कि सोज़-ए-दिल तिरा
पूछा कि जन्नत की फबन बोले तरह-दारी मिरी
मुज़्तर ख़ैराबादी
नज़्म
मौत
जाने कब पी थी अभी तक है मय-ए-ग़म का ख़ुमार
धुँदला धुँदला नज़र आता है जहान-ए-बेदार
मुईन अहसन जज़्बी
ग़ज़ल
सुब्ह के दर्द को रातों की जलन को भूलें
किस के घर जाएँ कि इस वा'दा-शिकन को भूलें
जाँ निसार अख़्तर
ग़ज़ल
इंसाफ़ मोहब्बत सच्चाई वो रहम-ओ-करम के दिखलावे
कुछ कहते ज़बाँ शरमाती है पूछो न जलन मेरे दिल की
शैलेन्द्र
नज़्म
फ़ना का सफ़र
कि मैं उस के हाथों पे मेहंदी लगाऊँ
मगर शायरी एक देवी है जिस की जलन को










