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शाद लखनवी

1805 - 1899

ग़ज़ल 52

शेर 17

जवानी से ज़ियादा वक़्त-ए-पीरी जोश होता है

भड़कता है चराग़-ए-सुब्ह जब ख़ामोश होता है

passion runneth stronger in dotage than in youth

the flame flickers burning brighter ere it dies forsooth

passion runneth stronger in dotage than in youth

the flame flickers burning brighter ere it dies forsooth

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तड़पने की इजाज़त है फ़रियाद की है

घुट के मर जाऊँ ये मर्ज़ी मिरे सय्याद की है

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वो नहा कर ज़ुल्फ़-ए-पेचाँ को जो बिखराने लगे

हुस्न के दरिया में पिन्हाँ साँप लहराने लगे

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पुस्तकें 1

Sukhan-e-Bemisal: Deewan-e-Shad

 

1901

 

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