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ग़ज़ल
अब वा'इज़-ओ-ज़ाहिद हैं बहम दस्त-ओ-गरेबाँ
इक जंग-ए-जमल आज मसाजिद में छिड़ी है
बद्र-ए-आलम ख़ाँ आज़मी
ग़ज़ल
तालिब-ए-सुल्ह हूँ मैं और नज़र तालिब-ए-जंग
रात दिन लड़ने पे तय्यार बड़ी मुश्किल है
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
ग़ज़ल
सफ़र जारी है सदियों से हमारा नब्ज़-ए-आलम में
निगाहों से ज़माने की मगर रू-पोश रहते हैं
शान-ए-हैदर बेबाक अमरोहवी
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रेख़्ता शब्दकोश
jang-e-barrii
जंग-ए-बर्री جَنْگِ بَرّی
खुश्की की लड़ाई, स्थल-युद्ध।
tasviir-e-ra.ng-e-zard-e-'aashiq
तस्वीर-ए-रंग-ए-ज़र्द-ए-'आशिक़ تَصْوِیْرِ رَنْگِ زَرْدِ عاشِق
picture of the pale (dejected) lover
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नज़्म
इंतिज़ार
मुज़्दा-ए-अम्न-ओ-अमाँ सुल्ह का पैग़ाम है क्या
जंग-ए-आज़ादी-ए-इंसाँ का सर-अंजाम है क्या
फ़ज़लुर्रहमान
ग़ज़ल
ज़ोर पर है ज़ोहद के पर्दे में जंग-ए-ज़र-गरी
शो'बदा-बाज़ी वही है सादा ईमानों के साथ
मंज़ूर अहमद मंज़ूर
नज़्म
जलियाँ-वाला बाग़
जंग-ए-आज़ादी की ज़िंदा यादगार
आस्ताँ पर तेरे सज्दे लाख बार
राम लाल वर्मा हिंदी
हास्य
मक़्तूल क्या बताए है कौन उस का क़ातिल
कब जाने ख़त्म होगी ये जंग-ए-हक़-ओ-बातिल