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नज़्म
मियाँ बीवी और 'ग़ालिब'
कहा शौहर ने क्या समझी हो बीबी
वो शाइ'र थे शराबी और कबाबी
सय्यद हशमत सुहैल
ग़ज़ल
ख़्वाहिश-ए-दिल है कि कीजे सैर-ए-अक़्लीम-ए-जुनूँ
टुक मदद को उस की ऐ ख़ाना-ख़राबी तू पहुँच
वलीउल्लाह मुहिब
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रेख़्ता शब्दकोश
kahaanii
कहानी کَہانی
कोई झूठी या मनगढंत बात। मुहा०-कहानी जोड़ना = आवश्यकता से अधिक और प्रायः अरुचि कर या निरर्थक वृत्तांत।। पद-राम-कहानी लंबा-चौड़ा वृत्तांत।
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ग़ज़ल
तरह ओले की जो ख़िल्क़त में हम आबी होते
अपने ही वास्ते बुनियाद-ए-ख़राबी होते
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
कुल्लियात
ख़ुश-तरह मकाँ दिल के ढाने में शिताबी की
इस इश्क़-ओ-मोहब्बत ने क्या ख़ाना-ख़राबी की
मीर तक़ी मीर
ग़ज़ल
गज़क की इस क़दर ऐ मस्त तुझ को क्या शिताबी है
हमारा भी दिल-ए-सद-लख़्त दूकान-ए-कबाबी है
शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम
नज़्म
कज-रवी का इश्तिहार
काश मैं होता शराबी और कबाबी और वो नेको-शिआर
बा-सफ़ा बे-ऐब सा मेरी तरह
कृष्ण मोहन
ग़ज़ल
अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें



