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नज़्म
शिकवा
शान आँखों में न जचती थी जहाँ-दारों की
कलमा पढ़ते थे हमीं छाँव में तलवारों की
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
आदमी-नामा
चलता है आदमी ही मुसाफ़िर हो ले के माल
और आदमी ही मारे है फाँसी गले में डाल
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
मुफ़्लिसी
जो अहल-ए-फ़ज़्ल आलिम ओ फ़ाज़िल कहाते हैं
मुफ़्लिस हुए तो कलमा तलक भूल जाते हैं
नज़ीर अकबराबादी
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रेख़्ता शब्दकोश
chaltaa
चलता چَلْتا
अस्थिरता, चंचलता १. जो चल रहा हो। जो गति में हो। जैसे-चलती गाड़ी में से मत उतरो। (किसी को) चलता करना जैसे-तैसे दूर करना या हटाना। पीछा छुड़ाने के लिए रवाना करना। जैसे-मैंने दो-चार बातें करके उन्हें चलता किया। (कोई काम) चलता करना जैसे-तैसे निपटाना या पूरा करना। जैसे-कई काम तो आज मैंने यों ही चलते किये। (किसी व्यक्ति का) चलता या चलते बनना या होना = चुपचाप खिसक या हट जाना। जैसे-झगड़ा बढ़ता हुआ देखकर मैं तो वहाँ से चलता बना। चलते-फिरते नजर आना = चलता या चलते बनना। जैसे-अब आप यहाँ से चलते-फिरते नजर आइए। २. जो प्रचलन या व्यवहार में बराबर आ रहा हो। जैसे-चलता माल, चलता सिक्का।
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नज़्म
जिस रोज़ क़ज़ा आएगी
लिल्लाहिल-हम्द ब-अनजाम-ए-दिल-ए-दिल-ज़दगाँ
कलमा-ए-शुक्र ब-नाम-ए-लब-ए-शीरीं-दहनाँ
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़ज़ल
बहादुर शाह ज़फ़र
नज़्म
शीशा का आदमी
ज़बाँ से कलमा-ए-हक़-रास्त कुछ कहा जाता
ज़मीर जागता और अपना इम्तिहाँ होता
अख़्तरुल ईमान
नज़्म
जान बेटा ख़िलाफ़त पे दे दो
बूढ़ी अमाँ का कुछ ग़म न करना
कलमा पढ़ पढ़ ख़िलाफ़त पे मरना
शफ़ीक़ रामपुरी
नज़्म
तराना-ए-क़ौमी
जबकि जारी हो ज़बानों पर ये कलमा सुब्ह ओ शाम
नग़्मा-हा-ए-साज़ से बढ़ कर है जो मोजज़ निज़ाम
सफ़ीर काकोरवी
ग़ज़ल
यूँ दिलाया है उसे अपनी मोहब्बत का यक़ीन
मुंकिर-ए-दीं को पढ़ाया गया कलमा जैसे
इब्राहीम अली ज़ीशान
ग़ज़ल
फिर लब पे तेरे कलमा-ए-अफ़्सोस किस लिए
मैं ने तो तेरे जब्र का शिकवा नहीं किया
राम अवतार गुप्ता मुज़्तर
नज़्म
तदफ़ीन
कुछ और नहीं तो आज शहादत का कलमा सुनने को मिलेगा
कानों के इक सदी पुराने क़ुफ़्ल खुलेंगे
अहमद नदीम क़ासमी
नज़्म
एक सवाल
कलमा-ए-हक़ कहा
मक़्तलों क़ैद-ख़ानों सलीबों में बहता लहू उन के होने का ऐलान करता रहा




