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शेर
दुनिया के जो मज़े हैं हरगिज़ वो कम न होंगे
चर्चे यूँही रहेंगे अफ़्सोस हम न होंगे
आग़ा मोहम्मद तक़ी ख़ान तरक़्क़ी
ग़ज़ल
नुमायाँ हो के दिखला दे कभी उन को जमाल अपना
बहुत मुद्दत से चर्चे हैं तिरे बारीक-बीनों में
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
चरके वो दिए दिल को महरूमी-ए-क़िस्मत ने
अब हिज्र भी तन्हाई और वस्ल भी तन्हाई
सूफ़ी ग़ुलाम मुस्ताफ़ा तबस्सुम
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नज़्म
इक शहंशाह ने बनवा के....
इस के साए में सदा प्यार के चर्चे होंगे
ख़त्म जो हो न सकेगी वो कहानी दी है
शकील बदायूनी
नज़्म
वालिदा मरहूमा की याद में
और अब चर्चे हैं जिस की शोख़ी-ए-गुफ़्तार के
बे-बहा मोती हैं जिस की चश्म-ए-गौहर-बार के
अल्लामा इक़बाल
उद्धरण
आसमान की चील, चौखट की कील और कोर्ट के वकील से ख़ुदा बचाए, नंगा करके छोड़ते हैं।...
मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी
ग़ज़ल
सैर ही करके आ जाएँगे फिर बाज़ार-ए-तमाशा की
जिस शय को भी हाथ लगाएँ क़ीमत बहुत ज़ियादा है
ज़फ़र इक़बाल
नज़्म
नया जन्म
वो गप शप क़हक़हे वो अपने अपने इश्क़ के क़िस्से
वो मीरास रोड की बातें वो चर्चे ख़ूब-रूयों के
ख़लील-उर-रहमान आज़मी
ग़ज़ल
शहर में धूम है इक शोला-नवा की 'मख़दूम'
तज़्किरे रस्तों में चर्चे हैं परी-ख़ानों में





