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ग़ज़ल
लग़्ज़िश-ए-साक़ी-ए-मय-ख़ाना ख़ुदा ख़ैर करे
फिर न टूटे कोई पैमाना ख़ुदा ख़ैर करे
अब्दुल्लतीफ़ शौक़
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शेर
लग़्ज़िश-ए-साक़ी-ए-मय-ख़ाना ख़ुदा ख़ैर करे
फिर न टूटे कोई पैमाना ख़ुदा ख़ैर करे
अब्दुल्लतीफ़ शौक़
ग़ज़ल
साग़र में पड़ा 'अक्स-ए-रुख़-ए-साक़ी-ए-महवश
पैदा हुआ महताब में महताब का 'आलम
धर्मपाल गुप्ता वफ़ा देहलवी
नअत
जिस को हासिल हैं ग़म-ए-साक़ी-ए-कौसर के मज़े
उस की तक़दीर में हैं रहमत-ए-दावर के मज़े
पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर गीलानी
ग़ज़ल
निगाह-ए-साक़ी-ए-ना-मेहरबाँ ये क्या जाने
कि टूट जाते हैं ख़ुद दिल के साथ पैमाने
मजरूह सुल्तानपुरी
ग़ज़ल
शब ख़ुमार-ए-शौक़-ए-साक़ी रुस्तख़ेज़-अंदाज़ा था
ता-मुहीत-ए-बादा सूरत ख़ाना-ए-ख़म्याज़ा था
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
ज़हर-ए-चश्म-ए-साक़ी में कुछ अजीब मस्ती है
ग़र्क़ कुफ़्र ओ ईमाँ हैं दौर-ए-मय-परस्ती है
रविश सिद्दीक़ी
ग़ज़ल
रंग है ऐ साक़ी-ए-सरशार क़ैसर-बाग़ में
फूल पीते हैं तिरे मय-ख़्वार क़ैसर-बाग़ में







