आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "khe"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "khe"
नज़्म
मुझे जाना है इक दिन
अभी तो हुस्न के पैरों पे है जब्र-ए-हिना-बंदी
अभी है इश्क़ पर आईन-ए-फ़र्सूदा की पाबंदी
असरार-उल-हक़ मजाज़
ग़ज़ल
याद आता है वो हर्फ़ों का उठाना अब तक
जीम के पेट में एक नुक्ता है और ख़ाली हे
इंशा अल्लाह ख़ान इंशा
हास्य
आज बस इतना बता दो कि है जज़्बात की रात
ख़ुद को तुम दिन के उजाले से बचाते क्यूँ हो
हिलाल सिवहारवी
पृष्ठ के संबंधित परिणाम "khe"
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम "khe"
ग़ज़ल
अबरार आबिद
शायरी के अनुवाद
अकेला बैठा हुआ हूँ यहाँ चलती राह के किनारे
जो भोर के समय संगीत की नाव को खे कर दिलों के घाट पर ले आए
रबीन्द्र नाथ टैगोर
नज़्म
मुझ से पहली सी मोहब्बत मिरी महबूब न माँग
तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
तू जो मिल जाए तो तक़दीर निगूँ हो जाए



