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ग़ज़ल
मेरी पहचान तो मुश्किल थी मगर यारों ने
ज़ख़्म अपने जो कुरेदे हैं तो पाया है मुझे
अहमद नदीम क़ासमी
ग़ज़ल
क्यूँ आ के हर इक शख़्स मिरे ज़ख़्म कुरेदे
क्यूँ मैं भी हर इक शख़्स को हाल अपना सुनाऊँ
अतहर नफ़ीस
नज़्म
तसलसुल
इल्म ने आज कुरेदे हैं वो ज़ुल्मात के ढेर
वक़्त ने जिस पे बिठाए थे फ़ना के पहरे
अहमद फ़राज़
नज़्म
हिज्र के पर भीग जाएँ
कहाँ तक ख़ौफ़ के बे-शक्ल सहरा की हथेली पर
कुरेदे जाएँ आँखें और
नोशी गिलानी
ग़ज़ल
मुद्दत से कुरेदे भी नहीं याद किसी की
फिर ज़ख़्म मिरे सीने के भर क्यों नहीं जाते
पंडित विद्या रतन आसी
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kured
कुरेद کُرید
छानबीन, तलाश, कुरेदने की क्रिया या भाव, किसी के मन में होने वाली खलबली या उत्कट जिज्ञासा को जानने की उत्सुकता
curette
curette curette
चमचे की शक्ल का एक आला जर्राही, कुरेदनी-
kured lagnaa
कुरेद लगना کُرید لَگْنا
किसी राज़ को जानने की इच्छा पैदा होना, तलाश होना, जिज्ञासा होना
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ग़ज़ल
ज़िंदगी भर पै-ब-पै हम ने कुरेदे अपने ज़ख़्म
हम से छुट कर उस पे क्या गुज़री ये सोचा ही नहीं
अजमल अजमली
नज़्म
नुक़ूश
कौन बरसों की बुझी राख कुरेदे ऐ दोस्त
गाँव से दूर किसी अजनबी रह-रव की तरह
प्रेम वारबर्टनी
ग़ज़ल
चुभो दिए हैं दिलों में जो ख़ार-ए-ग़म तुम ने
उन्हीं से ज़ख़्म कुरेदे वफ़ा-शिआ'रों ने
सलाहुद्दीन फ़ाइक़ बुरहानपुरी
नज़्म
बहुत शोर है
वो हँसती है और गिर्या-ए-नीम-शब के समुंदर पे अपना अलम खोलती है
हाथ जल मकड़ियों से कुरेदे हुए
मोहम्मद अनवर ख़ालिद
ग़ज़ल
राख के ढेर हैं हम कौन कुरेदे हम को
लाख हम अहल-ए-वफ़ा आतिश-ए-पिन्हाँ में जलें
सय्यद मोहम्मद अहमद नक़वी
ग़ज़ल
छुपा लेते हैं अपनी आँख के आँसू क़रीने से
कुरेदे जाने पर ही दर्द हम अपना बताते हैं
लोकेश त्रिपाठी
ग़ज़ल
वक़्त की कोख से इक 'उम्र के लम्हे निकले
जब कुरेदे गए लम्हे तो ज़माने निकले



