आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "masco"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "masco"
ग़ज़ल
शोख़-ओ-शादाब-ओ-हसीं सादा-ओ-पुरकार आँखें
मस्त-ओ-सरशार-ओ-जवाँ बे-ख़ुद-ओ-होशियार आँखें
अली सरदार जाफ़री
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
रेख़्ता शब्दकोश
mako
मको مَکو
(वनस्पतिविज्ञान) छोटे-छोटे पत्तों वाली एक बूटी जो साग के रूप में पका कर खाई जाती है अथवा उसका फल जिसमें मटर के दानों से कुछ छोटे मलगजे भूरे रंग के गोल-गोल फल लगते हैं, पत्ते और फल दोनों सूजन ख़त्म होने और पुराने बुख़ार के साध्य के लिए दवा के रूप में प्रयुक्त
पुस्तकें के संबंधित परिणाम "masco"
अन्य परिणाम "masco"
नज़्म
मशरिक़ हार गया
क़ुब्ला-ख़ान तुम हार गए हो!
और तुम्हारे टुकड़ों पर पलने वाला लालची मारको-पोलो
सलीम अहमद
नज़्म
बेवा की ख़ुद-कुशी
सो रहे हैं मस्त-ओ-बे-ख़ुद घर के कुल पीर-ओ-जवाँ
हो गई हैं बंद हुस्न-ओ-इश्क़ में सरगोशियाँ
कैफ़ी आज़मी
ग़ज़ल
मंज़िल-ए-इश्क़ से गुज़र बे-ख़ुद-ओ-मस्त-ओ-बे-ख़बर
चोट लगे तो उफ़ न कर दिल को दबा के भूल जा
ख़ुमार बाराबंकवी
नज़्म
आगही
फ़ुनून-ए-लतीफ़ा ख़ुदावंद के हुक्म-नामे, फ़रामीन
जिन्हें मस्ख़ करते रहे पीर-ज़ादे, जहाँ के अनासिर
अख़्तरुल ईमान
नज़्म
इल्म की ज़रूरत
हुदूद-ए-इस्तवा क़ुतबैन से यूँ हो गए मुदग़म
कि है अब रुबअ मस्कों जैसे घर की चार-दीवारी
अहमक़ फफूँदवी
ग़ज़ल
बशीर बद्र
ग़ज़ल
किस की निगह की गर्दिश थी 'मीर' रू-ब-मस्जिद
मेहराब में से ज़ाहिद मस्त-ओ-ख़राब निकला
मीर तक़ी मीर
ग़ज़ल
किस किस फूल की शादाबी को मस्ख़ करोगे बोलो!!!
ये तो उस की देन है जिस को चाहे वो महकाए

