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नज़्म
बंजारा-नामा
क्या बधिया भैंसा बैल शुतुर क्या गौनें पल्ला सर-भारा
क्या गेहूँ चाँवल मोठ मटर क्या आग धुआँ और अँगारा
नज़ीर अकबराबादी
ग़ज़ल
क़मर जलालवी
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नज़्म
होली
दिल शाद किया और मोह लिया ये, जौबन पाया होली ने
कुछ तबले खटके ताल बजे कुछ ढोलक और मुर्दंग बजी
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
आओ फिर से दिया जलाएँ
वर्तमान के मोह जाल में आने वाला कल न भुलाएँ
आओ फिर से दिया जलाएँ
अटल बिहारी वाजपेयी
उद्धरण
बाज़-औक़ात ग़रीब को मूंछ इसलिए रखनी पड़ती है कि वक़्त-ए-ज़रूरत नीची कर के जान की अमान पाए।...
मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी
नज़्म
मैं नशे में हूँ
''यारो मुझे माफ़ रखो मैं नशे में हूँ''
''अब दो तो जाम ख़ाली ही दो मैं नशे में हूँ''
