आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "mujtahid"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "mujtahid"
शेर
मैं 'हसरत' मुज्तहिद हूँ बुत-परस्ती की तरीक़त का
न पूछो मुझ को कैसा कुफ़्र है इस्लाम क्या होगा
हसरत अज़ीमाबादी
ग़ज़ल
न फ़लसफ़ी न मुफ़क्किर न मुज्तहिद न ख़तीब
'वफ़ा' ये कुछ भी नहीं हूँ मगर वफ़ा हूँ मैं
वफ़ा मलिकपुरी
ग़ज़ल
कर दिया मुज्तहिद-ए-वक़्त को क़ातिल झट-पट
हम ने मस्जिद में कल ऐसे ही क़यामत की बहस
इंशा अल्लाह ख़ान इंशा
अन्य परिणाम "mujtahid"
ग़ज़ल
सोच पर पहरे 'हिदायत' हों तो क्या हो इर्तिक़ा
मुज्तहिद भी बन गया है ख़ोशा-चीं तक़लीद का
हिदायतुल्लाह
ग़ज़ल
न मुज्तहिद है न सूफ़ी मगर तिरा 'मंज़ूर'
अज़ीज़-तर है जहाँ की निगाह में ऐ दोस्त
मंज़ूर अहमद मंज़ूर
ग़ज़ल
वो नवा-ए-मुज़्महिल क्या न हो जिस में दिल की धड़कन
वो सदा-ए-अहल-ए-दिल क्या जो अवाम तक न पहुँचे
शकील बदायूनी
नज़्म
मता-ए-ग़ैर
मेरी दरमांदा जवानी की तमन्नाओं के
मुज़्महिल ख़्वाब की ताबीर बता दे मुझ को
साहिर लुधियानवी
ग़ज़ल
मैं मुज़्तरिब हूँ वस्ल में ख़ौफ़-ए-रक़ीब से
डाला है तुम को वहम ने किस पेच-ओ-ताब में
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
न जाने कितने गिले इस में मुज़्तरिब हैं नदीम
वो एक दिल जो किसी का गिला-गुज़ार नहीं
साहिर लुधियानवी
शेर
एक हो जाएँ तो बन सकते हैं ख़ुर्शीद-ए-मुबीं
वर्ना इन बिखरे हुए तारों से क्या काम बने









