आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "mutrib"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "mutrib"
पृष्ठ के संबंधित परिणाम "mutrib"
अन्य परिणाम "mutrib"
नज़्म
आज इक हर्फ़ को फिर ढूँडता फिरता है ख़याल
आज हर सुर से हर इक राग का नाता टूटा
ढूँडती फिरती है मुतरिब को फिर उस की आवाज़
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़ज़ल
मुतरिब से ये कहता था 'हश्र' अपनी ग़ज़ल सुन कर
है मेरी जवानी का भूला हुआ अफ़्साना
आग़ा हश्र काश्मीरी
ग़ज़ल
मुतरिब-ए-दिल ने मिरे तार-ए-नफ़स से 'ग़ालिब'
साज़ पर रिश्ता पए नग़्मा-ए-'बेदिल' बाँधा
मिर्ज़ा ग़ालिब
नज़्म
गोरिस्तान-ए-शाही
सोते हैं ख़ामोश आबादी के हंगामों से दूर
मुज़्तरिब रखती थी जिन को आरज़ू-ए-ना-सुबूर
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
इंक़लाब
छोड़ दे मुतरिब बस अब लिल्लाह पीछा छोड़ दे
काम का ये वक़्त है कुछ काम करने दे मुझे













