आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "naare"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "naare"
नज़्म
दरख़्त-ए-ज़र्द
वो शायद माइदे की गंद बिरयानी न खाती हो
वो नान-ए-बे-ख़मीर-ए-मैदा कम-तर ही चबाती हो
जौन एलिया
नज़्म
ख़ून फिर ख़ून है
कहीं शोला कहीं नारा कहीं पत्थर बन कर
ख़ून चलता है तो रुकता नहीं संगीनों से
साहिर लुधियानवी
पृष्ठ के संबंधित परिणाम "naare"
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम "naare"
नज़्म
अपनी मल्का-ए-सुख़न से
तितली का नाज़-ए-रक़्स ग़ज़ाला का हुस्न-ए-रम
मोती की आब गुल की महक माह-ए-नौ का ख़म
जोश मलीहाबादी
ग़ज़ल
क्या अजब कार-ए-तहय्युर है सुपुर्द-ए-नार-ए-इश्क़
घर में जो था बच गया और जो नहीं था जल गया
सलीम कौसर
शेर
क्या अजब कार-ए-तहय्युर है सुपुर्द-ए-नार-ए-इश्क़
घर में जो था बच गया और जो नहीं था जल गया
सलीम कौसर
नज़्म
भारत के सपूतों से ख़िताब
तन-मन मिटाए जाओ तुम नाम-ए-क़ौमीयत पर
राह-ए-वतन में अपनी जानें लड़ाए जाओ
लाल चन्द फ़लक
ग़ज़ल
वो तब'-ए-यास-परवर ने मुझे चश्म-ए-अक़ीदत दी
कि शाम-ए-ग़म की तारीकी को भी नूर-ए-सहर जाना
चकबस्त बृज नारायण
नज़्म
गोरिस्तान-ए-शाही
अरसा-ए-पैकार में हंगामा-ए-शमशीर क्या
ख़ून को गरमाने वाला नारा-ए-तकबीर क्या
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
हर्फ़-ए-इंकार है क्यूँ नार-ए-जहन्नम का हलीफ़
सिर्फ़ इक़रार पे क्यूँ बाब-ए-इरम खुलता है
वहीद अख़्तर
ग़ज़ल
कुछ मेहर-ए-क़यामत है न कुछ नार-ए-जहन्नम
हुश्यार कि वो क़हर-ओ-ग़ज़ब और ही कुछ है
फ़िराक़ गोरखपुरी
ग़ज़ल
जा के अब नार-ए-जहन्नम की ख़बर ले ज़ाहिद
नद्दियाँ बह गईं अश्कों की गुनहगारों में


