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नज़्म
वो सुब्ह कभी तो आएगी
इन भूकी प्यासी रूहों पर इक दिन तो करम फ़रमाएगी
वो सुब्ह कभी तो आएगी
साहिर लुधियानवी
ग़ज़ल
यहाँ एक बच्चे के ख़ून से जो लिखा हुआ है उसे पढ़ें
तिरा कीर्तन अभी पाप है अभी मेरा सज्दा हराम है
बशीर बद्र
ग़ज़ल
साहिर लुधियानवी
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paap
पाप پاپ
वह आचरण जो अशुभ अदृष्ट उत्पन्न करे, कर्ता का अघःपात करने वाला कर्म, ऐसा काम जिसका परिणाम कर्ता के लिये दुख हो, व्यक्ति और समाज के लिये अहितकर आचरण, धर्म या पुण्य का उलटा, बुरा काम, निंदित काम, अकल्याणकर कर्म, अनाचार, गुनाह
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नज़्म
ऐ इश्क़ कहीं ले चल
ऐ इश्क़ कहीं ले चल इस पाप की बस्ती से
नफ़रत-गह-ए-आलम से ल'अनत-गह-ए-हस्ती से
अख़्तर शीरानी
नज़्म
हुब्ब-ए-वतन
पर छुटा जिस से अपना मुल्क ओ दयार
जी हुआ तुम से ख़ुद-ब-ख़ुद बेज़ार
अल्ताफ़ हुसैन हाली
शेर
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तिरा कीर्तन अभी पाप है अभी मेरा सज्दा हराम है
बशीर बद्र
ग़ज़ल
मुईन अहसन जज़्बी
नज़्म
चकले
ममता के होंटों पर जब चाँदी की मोहरें लगती हैं
माँ ख़ुद अपनी बेटी को कर देती है क़ुर्बान यहाँ
क़तील शिफ़ाई
ग़ज़ल
अब भी खड़ी है सोच में डूबी उजयालों का दान लिए
आज भी रेखा पार है रावण सीता को समझाए कौन
अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा
शेर
जाने कितने राज़ खुलें जिस दिन चेहरों की राख धुले
लेकिन साधू-संतों को दुख दे कर पाप कमाए कौन
अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा
नज़्म
गुरूनानक
दर हक़ के कभी बंदा-ए-हाजी पे खुले हैं
गंगा में नहा कर भी कभी पाप धुले हैं









