aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "pho.dne"
दी फाइन आर्ट प्रिंटिंग, इलाहाबाद
पर्काशक
डैनियल डेफॉ
1660 - 1731
लेखक
फ़ोन ब्रन हार्डली
जी. पी. फौंडके
गंगा फ़ाइन आर्ट प्रेस, लखनऊ
डॉ. जी. पी. फोंडके
संपादक
एक्सेल फ़ाइन आर्ट, हैदराबाद
सफ़ाइर फ़ाइन प्रिंटिंग प्रेस, काचिगोड़ा
लकी फाइन आर्ट प्रिन्टिंग प्रेस, हैदराबाद
नेशनल फ़ाइन प्रिंटिंग प्रेस, हैदराबाद
फाइन प्रिंटर्स, अमरावती
आर सहगल फाइन प्रिंटिंग कॉलेज, इलाहाबाद
फाइन ओफ़्सेट वर्क्स, इलाहाबाद
अज़ादारी लिबरेशन फ्रंट, लखनऊ
फ़ाइन प्रेस, लखनऊ
अपना ग़ुस्सा उतारने के लिएफ़ोन पर शब गुज़ारने के लिए
क़िस्मत के फोड़ने को कोई और दर न थाक़ासिद मकान-ए-ग़ैर के क्यूँ मुत्तसिल गया
क्या ख़ाक मुदावा करें शोरीदा-सरी कासर फोड़ने को ढूँढें तो पत्थर नहीं मिलता
कभी सर फोड़ने देती नहीं दीवार से 'ताबिश'ये क्या दीवानगी है जो हमें नाकारा रखती है
मैं तुझ को छोड़ के सर फोड़ने कहाँ जाऊँमिरे नसीब में है तेरा संग-ए-दर फिर भी
पंजाबी की एक समृद्ध साहित्यिक परंपरा है जिसे हम सभी पसंद करते हैं। यहाँ कुछ लोकप्रिय पंजाबी कवियों की बेहतरीन अनूदित कविताओं का संग्रह दिया जा रहा है। आशा है कि आप को पसंद आएगा।
अगर आपको बस यूँही बैठे बैठे ज़रा सा झूमना है तो शराब शायरी पर हमारा ये इन्तिख़ाब पढ़िए। आप महसूस करेंगे कि शराब की लज़्ज़त और इस के सरूर की ज़रा सी मिक़दार उस शायरी में भी उतर आई है। ये शायरी आपको मज़ा तो देगी ही, साथ में हैरान भी करेगी कि शराब जो ब-ज़ाहिर बे-ख़ुदी और सुरूर बख़्शती है, शायरी मैं किस तरह मानी की एक लामहदूद कायनात का इस्तिआरा बन गई है।
आदमी या इन्सान सृष्टि की रचना का कारण ही नहीं बल्कि शायरी, संगीत और अन्य कलाओं का केंद्र बिंदु भी रहा है। उर्दू शायरी विशेष तौर पर ग़ज़ल के अशआर में इंसान अपनी सारी विशेषताओं, विषमताओं और विसंगतियों के साथ मौजूद है। हालांकि इंसान अपने आप में किसी पहेली से कम नहीं परन्तु इस पर जितने आसान और लोकप्रिय अशआर उर्दू में मौजूद हैं उनमें से केवल २० यहां आपके लिए प्रस्तुत हैं।
थोड़ेتھوڑے
कुछ, थोड़ा, कम, बिलकुल कम
फोड़नीپھوڑْنی
तोड़ने का एक आला
फोड़नाپھوڑٰنا
तोड़ना
फोड़ाپھوڑا
शारीरिक विकार के कारण होने वाला ऐसा व्रण जिसमें रक्त सडकर मवाद का रूप धारण कर लेता है, शरीर में किसी स्थान पर होने वाला ऐसा घाव जिसमें मवाद पड़ गया हो, बड़ी फुंसी, किसी दरख़्त का उभरा हुआ बैरूनी हिस्सा जो किसी बीमारी के सबब से हो
फ़न-ए-तर्जुमा निगारी
ख़लीक़ अंजुम
मज़ामीन / लेख
Fan-e-Sher-o-Shairi Aur Rooh-e-Balaghat
हमीदुल्लाह शाह हाश्मी
भाषा
Fan-e-Tarjuma Nigari
ज़हूरूद्दीन
अनुवाद: इतिहास एवं समीक्षा
Urdu Mein Fan-e-Sawaneh Nigari Ka Irtiqa
मुमताज़ फ़ाख़िरा
आत्मकथा
Fan-e-Mazmoon Nigari
आफ़ताब अज़हर सिद्दीक़ी
लेख
Fan-e-Shairi
अल्लामा अख़लाक़ देहलवी
शायरी तन्क़ीद
Fann-e-Khitabat
शोरिश काश्मीरी
व्याख्यान
Fan-e-Afsana Nigari
वक़ार अज़ीम
अफ़साना तन्क़ीद
Fun-e-Sahafat
पत्रकारिता
Urdu Zaban Aur Fan-e-Dastan Goi
कलीमुद्दीन अहमद
फ़िक्शन तन्क़ीद
Fauz-e-Mubeen Dar-Radd-e-Harkat-e-Zameen
अहमद रज़ा खां बरेलवी
Fan-e-Khattati Wa Makhtoota Shanasi
फ़ज़लुल हक़
सुलेखन
फ़न्न-ए-इदारत
मिसकीन हिजाज़ी
फ़हीमुद्दीन नूरी
Phundne
सआदत हसन मंटो
प्रतिबंधित पुस्तकें
सर ही हम फोड़ने जाएँ तो कहाँ जाएँगेखोखले काँच के बुत हैं तिरे बुतख़ानों में
कुछ अपने दिल के वलवले कुछ ज़ाहिदों की ज़िदसर फोड़ने को वर्ना वही आस्ताँ न था
मुझे सर फोड़ने में 'उज़्र क्या हैमगर उन का ही ही संग-ए-आस्ताँ हो
सर फोड़ने वाले रहें वल्लाह सलामतकुछ दिन में इबादत को भी पत्थर न मिलेगा
ज़मीं पे पक्की इमारतें उग रही हैं ऐसेदिवाने सर फोड़ने को पत्थर नहीं मलेगा
हुआ है वो शौक़-ए-दीद-बाज़ी कि समझें इस को भी सरफ़राज़ीबुलाएँ आँखें वो फोड़ने को तो नज़्र करने नज़र को चलिए
बस मुझे सर फोड़ने का शौक़ थाबात थी दीवार की दीवार से
अमीर-ए-अस्र से फ़रियाद करना चाहते हैंसरों को फोड़ने ये लोग पत्थरों से न जाएँ
नहीं ये फ़िक्र कि सर फोड़ने कहाँ जाएँबहुत बुलंद है अपने वजूद की दीवार
कुछ लुत्फ़ है सीना-कूबी में सर फोड़ने में हम-मस्तों कोबीबी ये 'इश्क़ के ज़ेवर हैं तुम यूँही हम को बनाती हो
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books