आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "sar-gamii-e-sabaa"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "sar-gamii-e-sabaa"
पृष्ठ के संबंधित परिणाम "sar-gamii-e-sabaa"
अन्य परिणाम "sar-gamii-e-sabaa"
नअत
चमन की सूखती शाख़ों ने जब उन को पुकारा है
बहारों के पयम्बर को सर-ए-दोष-ए-सबा देखा
ज़ौक़ी मुज़फ्फ़र नगरी
नज़्म
कनार-ए-आब की एक शाम
बदन चुराए हुए सर-ए-रहगुज़ार कोई जवाँ हसीना
सबा-ख़िराम-ओ-सबा-क़रीना
कृष्ण मोहन
ग़ज़ल
मिस्ल-ए-बाद-ए-सबा तेरे कूचे में ऐ जान-ए-जाँ आए हैं
चंद साअत रहेंगे चले जाएँगे सर-गराँ आए हैं
अतहर नफ़ीस
कुल्लियात
ख़तर कर तू न लग चल ऐ सबा उस ज़ुल्फ़ से इतना
बला आवेगी तेरे सर जो उस का एक मू टूटा
मीर तक़ी मीर
कुल्लियात
बशारत ऐ सबा दीजो असीरान-ए-क़फ़स को भी
तसल्ली को तुम्हारी सर पे रख दो फूल लाऊँगा

