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ग़ज़ल
कल जो गुलज़ार में हैं गोश-बर-आवाज़ 'अज़ीज़'
मुझ से बुलबुल ने लिया तर्ज़ ये शेवाई का
मिर्ज़ा मोहम्मद हादी अज़ीज़ लखनवी
नज़्म
शिकवा
है बजा शेवा-ए-तस्लीम में मशहूर हैं हम
क़िस्सा-ए-दर्द सुनाते हैं कि मजबूर हैं हम
अल्लामा इक़बाल
समस्त







