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ग़ज़ल
निकल कर तेरे कूचे से फ़राज़-ए-दार तक पहुँचे
तिरे 'आशिक़ वफ़ा के आख़िरी मे'यार तक पहुँचे
नरेन्द्र शाहिद
ग़ज़ल
फ़राज़-ए-दार को ज़ौक़-ए-जुनूँ तलाश करे
ये दिल कि तेरी नज़र का फ़ुसूँ तलाश करे
मुज़म्मिल अब्बास शजर
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ग़ज़ल
गुज़िश्ता शब जो हस्ती बर-फ़राज़-ए-दार थी मैं था
फिर अगले दिन जो सुर्ख़ी शौकत-ए-अख़बार थी मैं था
इदरीस आज़ाद
ग़ज़ल
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़ज़ल
तुम इसे कह लो हिसाब-ए-दोस्ताँ-दर-दिल 'फ़ज़ा'
हम ने अपना नफ़अ' भी लौह-ए-ज़ियाँ पर लिख दिया
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
नज़्म
अहल-ए-जुनूँ
बारिश-ए-संग-ए-अलम अपना मुक़द्दर ठहरी
राहत-ए-दर्द मिली लुत्फ़-ओ-करम के बदले

