आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "tabassum-e-be-amaa.n"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "tabassum-e-be-amaa.n"
ग़ज़ल
वो मिसाल-ए-बर्क़ नुमूद गुम-गश्तगी तबस्सुम-ए-बे-अमाँ
शफ़क़-आफ़रीं सी वो मौज लब दिल ओ जाँ में आग लगा गई
नियाज़ हैदर
ग़ज़ल
चमक जुगनू की बर्क़-ए-बे-अमाँ मालूम होती है
क़फ़स में रह के क़द्र-ए-आशियाँ मालूम होती है
सीमाब अकबराबादी
शेर
चमक जुगनू की बर्क़-ए-बे-अमाँ मालूम होती है
क़फ़स में रह के क़द्र-ए-आशियाँ मालूम होती है
सीमाब अकबराबादी
अन्य परिणाम "tabassum-e-be-amaa.n"
ग़ज़ल
चमन वालों से बर्क़-ए-बे-अमाँ कुछ और कहती है
मगर मेरी तो शाख़-ए-आशियाँ कुछ और कहती है
कैफ़ मुरादाबादी
ग़ज़ल
इस हुजूम-ए-बे-अमाँ में कोई अपना भी तो हो
मैं गले किस को लगाऊँ कोई ज़िंदा भी तो हो
इसहाक़ अतहर सिद्दीक़ी
ग़ज़ल
ये अपना शहर जो है दश्त-ए-बे-अमाँ ही तो है
इस ए'तिबार से दिल दर्द का मकाँ ही तो है
जावेद अख़्तर बेदी
ग़ज़ल
तिरी महफ़िल में दश्त-ए-बे-अमाँ ले कर नहीं आया
मैं अपने गहरे सन्नाटे यहाँ ले कर नहीं आया