aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "tez"
टेक चंद बहार
1687 - 1766
शायर
अतीया परवीन बिलग्रामी
लेखक
टेक चन्द भारती सहारनपुरी
Pandit Tej Ram
लाला तेज राम
तेज रॉय
Tej Qabil
टेड ग्रान्ट
तेज कुमार
टेक चंद जी महाराज
तेजराम एम. ए.
तेज बहादुर
1875 - 1949
टे.जीम.डेबोइर
हरबंस सिंघ तेज
ताज मुज़तर
तेज़ हवा ने मुझ से पूछारेत पे क्या लिखते रहते हो
हाँ फ़ज़ा याँ की सोई सोई सी हैतो बहुत तेज़ रौशनी हो क्या
समुंदर के सफ़र में इस तरह आवाज़ दे हम कोहवाएँ तेज़ हों और कश्तियों में शाम हो जाए
एक लम्हे में सिमट आया है सदियों का सफ़रज़िंदगी तेज़ बहुत तेज़ चली हो जैसे
चाहे है फिर किसी को मुक़ाबिल में आरज़ूसुरमे से तेज़ दश्ना-ए-मिज़्गाँ किए हुए
२०२२ ख़त्म हुआ आप लोगों ने उर्दू ज़बान-ओ -अदब और शाइरी से भरपूर मुहब्बत का इज़हार किया है । इस कलेक्शन में हम उन 10 नज़्मों को पेश कर रहे हैं जो रेख़्ता पर सबसे ज़्यादा पढ़ी गईं हैं।
२०२२ ख़त्म हुआ आप लोगों ने उर्दू ज़बान-ओ -अदब और शाइरी से भरपूर मुहब्बत का इज़हार किया है । इस कलेक्शन में हम उन 10 ग़ज़लों को पेश कर रहे हैं जो २०२२ में रेख़्ता पर सबसे ज़्यादा पढ़ी गईं हैं।
मशहूर शायर जिगर मोरादाबादी की दस बेहतरीन ग़ज़लें हाज़िर हैं
टेंٹیں
कर्कश या तीखा स्वर। पद-टे = व्यर्थ की बकवाद। महा०-टें बोलना या होना = चट-पट मर जाना।
तेज़تَیز
जल्द गुज़रने या असर करने वाला
आतेآتے
coming
आटेآٹے
सूखी पिसी हुई चीज़, बुरादा, चूरा
Ek Lamha Tez Safar Ka
मुनीर नियाज़ी
Tez Hawa Aur Tanha Phool
तेज़ हवा में जंगल मुझे बुलाता है
अली मोहम्मद फ़र्शी
नज़्म
Tere Dhyan Ki Tez Hawa
अमजद इस्लाम अमजद
Tez Tar Aur Door Tar
मीर नजाबत अली
विज्ञान
Kachchi Kali Tez Kiran
मंजू कमर
Tez Hawa Ke Jhonke
ज़फ़र अंसारी ज़फ़र
काव्य संग्रह
Shama Ki Lau Tez Karo
रियाज़ रऊफ़ी
Saz Ki Lai Tez Karo
अननोन ऑथर
भाषा
Khusbudar Tel Wa Itr Banana
पंडित वेद प्रकाश शर्मा
Jadeed Urdu Grammar
Babar Nama
मोहम्मद क़ासिम सिद्दीक़ी
शख़्सियत
Tareekh Falsafa-e-Islam
दर्शन / फ़िलॉसफ़ी
रूस: इंक़लाब से रद्द-ए-इंक़लाब तक
इतिहास
Kitne Toba Tek Singh
भीष्म साहनी
इंतिख़ाब / संकलन
इतनी तेज़ और इतनीऊँची हो जाए
क्या जानिए क्यूँ तेज़ हवा सोच में गुम हैख़्वाबीदा परिंदों को दरख़्तों से उड़ा कर
रक़्स-ए-मय तेज़ करो साज़ की लय तेज़ करोसू-ए-मय-ख़ाना सफ़ीरान-ए-हरम आते हैं
दिल आज भी जलता है उसी तेज़ हवा मेंऐ तेज़ हवा देख बिखर जाएँगे इक दिन
तेज़ है वक़्त की रफ़्तार बहुतऔर बहुत थोड़ी सी फ़ुर्सत है मुझे
हवाएँ इत्र-बेज़ होंतो शौक़ क्यूँ न तेज़ हों
लहजे की तेज़ धार से ज़ख़्मी किया उसेपैवस्त दिल में लफ़्ज़ की संगीन हम ने की
इतने दुखों की तेज़ हवा मेंदिल का दीप जला रक्खा है
दिन अभी बाक़ी है 'इक़बाल' ज़रा तेज़ चलोकुछ न सूझेगा तुम्हें शाम के ढलते ढलते
बड़ी तेज़ जौलाँ बड़ी ज़ूद-रसअज़ल से अबद तक रम-ए-यक-नफ़स
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