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नज़्म
मैं न कहता था तुम से
मैं न कहता था तुम से रह में छोड़ जाओगी
इश्क़ इक रियाज़त है कैसे ठैर पाओगी
अबु बक्र अब्बाद
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ग़ज़ल
क्या ही शिकार-फ़रेबी पर मग़रूर है वो सय्याद बचा
ताइर उड़ते हवा में सारे अपने असारा जाने है
मीर तक़ी मीर
ग़ज़ल
मैं तमाम दिन का थका हुआ तू तमाम शब का जगा हुआ
ज़रा ठहर जा इसी मोड़ पर तेरे साथ शाम गुज़ार लूँ
बशीर बद्र
ग़ज़ल
मिरे ताइर-ए-नफ़स को नहीं बाग़बाँ से रंजिश
मिले घर में आब-ओ-दाना तो ये दाम तक न पहुँचे
शकील बदायूनी
नज़्म
ख़िज़्र-ए-राह
मौज-ए-मुज़्तर थी कहीं गहराइयों में मस्त-ए-ख़्वाब
रात के अफ़्सूँ से ताइर आशियानों में असीर
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
तस्वीर-ए-दर्द
अता ऐसा बयाँ मुझ को हुआ रंगीं-बयानों में
कि बाम-ए-अर्श के ताइर हैं मेरे हम-ज़बानों में
