इश्क़ में ख़ुद से मोहब्बत नहीं की जा सकती

जमाल एहसानी

इश्क़ में ख़ुद से मोहब्बत नहीं की जा सकती

जमाल एहसानी

MORE BYजमाल एहसानी

    इश्क़ में ख़ुद से मोहब्बत नहीं की जा सकती

    पर किसी को ये नसीहत नहीं की जा सकती

    कुंजियाँ ख़ाना-ए-हम-साया की रखते क्यूँ हो

    अपने जब घर की हिफ़ाज़त नहीं की जा सकती

    कुछ तो मुश्किल है बहुत कार-ए-मोहब्बत और कुछ

    यार लोगों से मशक़्क़त नहीं की जा सकती

    ताइर-ए-याद को कम था शजर-ए-दिल वर्ना

    बे-सबब तर्क-ए-सुकूनत नहीं की जा सकती

    इक सफ़र में कोई दो बार नहीं लुट सकता

    अब दोबारा तिरी चाहत नहीं की जा सकती

    कोई हो भी तो ज़रा चाहने वाला तेरा

    राह चलतों से रक़ाबत नहीं की जा सकती

    आसमाँ पर भी जहाँ लोग झगड़ते हों 'जमाल'

    उस ज़मीं के लिए हिजरत नहीं की जा सकती

    RECITATIONS

    जमाल एहसानी

    जमाल एहसानी

    जमाल एहसानी

    इश्क़ में ख़ुद से मोहब्बत नहीं की जा सकती जमाल एहसानी

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi volutpat porttitor tortor, varius dignissim.

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY