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ग़ज़ल
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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नज़्म
सुर्ख़ सितारा
इस की किरनों में है चलती हुई तलवार की काट
इस की सुर्ख़ी में है उमडे हुए दरिया का बहाव
आमिर उस्मानी
नज़्म
क्या गुल-बदनी है
गर्दन में चंदन-हार है हाथों में है कंगन
उमडे हुए इश्वे हैं गरजता हुआ जौबन
जोश मलीहाबादी
ग़ज़ल
दामन-ए-यार ने हक़ अपना जताया न कभी
अश्क उमडे भी तो पलकों में छुपाए हम ने
सुलैमान अरीब हैदराबादी
नज़्म
तुलू-ए-इश्तिराकियत
चौक चौक पर गली गली में सुर्ख़ फरेरे लहराते हैं
मज़लूमों के बाग़ी लश्कर सैल-सिफ़त उमडे आते हैं
साहिर लुधियानवी
ग़ज़ल
सावन की पुर्वाई ने क्या दुखती चोट दिखाई है
कैसे आँसू उमडे हैं जब याद तुम्हारी आई है
तालिब बाग़पती
ग़ज़ल
बादा-नोशों के दुआ करते ही बादल उमडे
अक़्ल हैरान है ज़ाहिद की ये होता क्या है
मोहम्मद यूसुफ़ रासिख़
ग़ज़ल
दिल से उमडे अश्क-ए-ख़ूँ आँखों की राह
जोश-ए-मय से ख़ुम का ढकना खुल गया
पंडित दया शंकर नसीम लखनवी
ग़ज़ल
पी तो लूँ आँखों में उमडे हुए आँसू लेकिन
दिल पे क़ाबू भी तो हो ज़ब्त का यारा भी तो हो






