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नज़्म
ख़िज़्र-ए-राह
अंजुम-ए-कम-ज़ौ गिरफ़्तार-ए-तिलिस्म-ए-माहताब
देखता क्या हूँ कि वो पैक-ए-जहाँ-पैमा ख़िज़्र
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
दर्शन सिंह
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ग़ज़ल
हमें कू-ब-कू जो लिए फिरी किसी नक़्श-ए-पा की तलाश थी
कोई आफ़्ताब था ज़ौ-फ़गन सर-ए-रहगुज़ार कहाँ रहा
अदा जाफ़री
नज़्म
अपनी मल्का-ए-सुख़न से
ऐ किर्दगार-ए-मा'नी ओ ख़ल्लाक़-ए-शेर-ए-तर
ऐ जान-ए-ज़ौक़ ओ मुहसिना-ए-लैली-ए-हुनर
जोश मलीहाबादी
नज़्म
मैं नहीं तो क्या
वही शफ़क़ है वही ज़ौ है मैं नहीं तो क्या
मिरे बग़ैर भी तुम कामयाब-ए-इशरत थीं
साहिर लुधियानवी
नज़्म
शिकस्त-ए-साज़
कभी ज़ौ-पाश सितारों की तमन्ना थी मुझे
आज ज़र्रों को भी मक़्सूद बना रक्खा है
अदा जाफ़री
ग़ज़ल
सितारों की तरह अल्फ़ाज़ की ज़ौ बढ़ती जाती है
ग़ज़ल में हुस्न उस चेहरे की ताबानी से आया है





